नगर:श्री रामलीला कला मंडल, ब्रजनगर
द्वारा आयोजित ब्रजनगर रामलीला महोत्सव - 2026
पंचम दिवस मंचन में करुणा रस से परिपूर्ण लीला का भाव पूर्ण मंचन किया गया। दशरथ जी को रानी कैकेई के कोपभवन जाने का समाचार मिलता है तो वो दुखी मन से कोप भवन में पहुंचते है वहां देखते है कि रानी के वस्त्राभूषण बिखरे हुए हैं। राजा उनसे कारण पूछता है तो वो कहती है मेरे 2 वरदान आप पर बकाया है उन्हें पूरा करो तब दशरथ जी कहते आज तुम्हारे प्रिय पुत्र राम को राज्याभिषेक होना है आप कुछ भी मांगो वही मिलेगा लेकिन आप मंगल वस्त्र धारण करो और कोप भवन से बाहर आओ और खुशियां मनाओ। लेकिन रानी कहते पहले आप पुत्र राम की सौगंध खाओ तब में वर मागूंगी । आप हर बार यही कहते हो मांगो लेकिन देते हो नहीं। राम की सौगंध खाने पर रानी भरत के लिए युवराज पद और राम के लिए तपस्वी वेश में 14 बर्ष वनवास मांगती है। ऐसा सुनते है राजा दुखी होता है और मूर्छित हो जाते हैं। इस तरह के कैकेई के वचन को सुनकर दर्शकों में भी उदासी छा जाती है , दशरथ के करुण विलाप से दर्शकों के अश्रु बह निकलते हैं। दशरथ कैकेई संवाद का शानदार मंचन हुआ उधर प्रातः काल दशरथ के नहीं जागने पर पुर वासियों को चिंता होती है।सुमंत जी को महल भेजते हैं, वहां की दशा देखकर वो भी दुखी होते हैं। दशरथ की मूर्छा टूटती है और राम राम कहकर विलाप करते हुए जागते हैं। फिर राम जी वहां आते है कैकेई राम को राजा के वचनों के बारे में बताती है, राम कौशल्या से वन जाने की आज्ञा लेते हैं। फिर लक्ष्मण जी आते हैं माता सुमित्रा से आज्ञा लेने जाती है।राम लक्ष्मण को वन वस्त्र धारण करते हैं। यहां *राम वनों को जाता री माता , सर पर जटा रखाता री माता* सुंदर गाने का प्रस्तुतिकरण किया गया। दशरथ जी सुमंत को रथ सजाकर उसने राम लक्ष्मण सीता को 4,5 दिन वन में घुमा कर लाने का आदेश देते है। सुमंत रथ को सजाकर उनको वन ले जाते हैं। यहां तक लीला का सुंदर मंचन किया जाता है।