रात के 11:30 बज चुके हैं… त्योहार का दिन है, लोग अपने परिवार के साथ खुशियां मना रहे हैं, लेकिन एक पत्रकार आज भी भादरा थाने के सामने जनता के बीच खड़ा है।
मकसद सिर्फ इतना है कि जनता की आवाज को दबने न दिया जाए। लोगों की मांग, उनकी परेशानी और उनके हक की बात शासन-प्रशासन तक पहुंचे और आमजन को भी पता चले कि उनके आसपास, उनके क्षेत्र में क्या चल रहा है।
पत्रकारिता सिर्फ खबर दिखाने का नाम नहीं, बल्कि जरूरत के समय जनता के साथ खड़े रहने का नाम है।
ना त्योहार की परवाह, ना रात की थकान… क्योंकि जब जनता अपनी आवाज उठाती है, तो पत्रकार का फर्ज है उस आवाज को बुलंद करना।
जनता की आवाज, जनता के साथ… यही है पत्रकारिता का असली धर्म।
✍️ Dinesh Thereporter
BHADRA VOICE