आज लखनऊ से आई इस हृदयविदारक खबर ने दिल को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। जो बच्चे अपने सुनहरे भविष्य के सपने लेकर, अपने माता- पिता की आँखों की उम्मीद बनकर घर से निकले थे, उन्हें क्या पता था कि वे व्यवस्था की इस घोर लापरवाही की भेंट चढ़ जाएंगे। एक और हंसता-खेलता परिवार आज तबाह हो गया। इन मासूमों के परिवारों पर जो बीत रही होगी, उसकी कल्पना करके ही रूह काँप उठती है। ईश्वर इस असीम दुख की घड़ी में परिजनों को संबल दे।
लेकिन संवेदनाओं से आगे बढ़कर अब कुछ कड़े सवाल पूछने का वक्त आ गया है। आखिर कब तक?
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले **कोटा** और ** दिल्ली** के कोचिंग सेंटरों में भी ऐसे ही भयानक अग्निकांड हुए थे, जहाँ कई मासूमों ने अपनी जान गंवाई थी। उस वक्त भी बड़े-बड़े दावे किए गए थे, जांच की बातें हुई थीं, लेकिन जमीन पर क्या बदला? आज लखनऊ की इस घटना ने साबित कर दिया कि हमने पुराने हादसों से कोई सबक नहीं सीखा। a1 News Uttarakhand
Uttarakhand, India | Jun 23, 2026