मुंबई के अशोकनगर में स्थित बुद्ध भूमि फाउंडेशन के परिसर में सुबह का माहौल हमेशा की तरह शांत था। लोग ध्यान कर रहे थे, बच्चे परिसर में खेल रहे थे और कुछ श्रद्धालु बुद्ध प्रतिमाओं के सामने दीप जला रहे थे।
लेकिन एक दिन लोगों ने देखा कि परिसर की कई बुद्ध प्रतिमाएँ और स्मारक क्षतिग्रस्त पड़े हैं। हैरानी की बात यह थी कि ऐसा करने के लिए कोई आधिकारिक आदेश भी नहीं था। यह दृश्य देखकर लोगों के मन में दुख और आक्रोश दोनों पैदा हुए।
फाउंडेशन के सदस्यों ने कहा, "प्रतिमाएँ केवल पत्थर की मूर्तियाँ नहीं हैं, वे शांति, करुणा और समानता का प्रतीक हैं।" इसके बाद स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर प्रतिमाओं और स्मारकों के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया।
लेकिन बुद्ध के विचारों-करुणा, अहिंसा और मानवता को कभी नहीं तोड़ा जा सकता।
संदेशः विचारों की शक्ति किसी भी विनाश से बड़ी होती है।
Hardoi, Hardoi | Jun 2, 2026