कोहंड में आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम
6 महीने में तैयार हो जाएगा एसएचजी का ट्रेनिंग सेंटर : कल्याण
बोले-छोटे कार्यों से संकोच न करें युवा
करनाल, 4 अक्तूबर। हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा है कि माताओं-बहनों के बिना समाज में कुछ नहीं है। समाज की मजबूती के लिए महिलाओं का स्वावलंबी होना जरूरी है। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए घरौंडा में प्रदेश का पहला प्रशिक्षण केंद्र बनाया जा रहा है जो 6 महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं और बेहतर क्वालिटी के उत्पाद तैयार कर सकेंगी जिससे उन्हें बाजार में अच्छा भाव मिल सकेगा। महिलाओं के हाथों में आई कमाई से अधिक बरकत होती है। जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। कामयाबी के लिए कठिन परिश्रम जरूरी है।
श्री कल्याण आज जिला के गांव कोहंड में सेवा संकल्प अभियान के तहत खंड स्तरीय आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस मौके पर सरपंच की ओर से विधानसभा अध्यक्ष का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया। इससे पहले श्री कल्याण ने आंगनवाड़ी केंद्र परिसर में पौधारोपण किया। इस अवसर पर गोद भराई, कुआं पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्री कल्याण ने सेल्फी प्वाइंट और सुंदर रंगोली के लिए वर्कर्स की टीम को बधाई दी।
कोई कार्य छोटा या बड़ा नहीं
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कई बार शिक्षित होने के बाद सोच बदल जाती है। नौजवान छोटे कार्य से संकोच करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि छोटे कार्य से ही व्यक्ति बड़ा बना है। बाबा साहेब अंबेडकर गरीब परिवार से थे, उन्होंने देश का संविधान लिखा। इसी प्रकार एपीजे अब्दुल कलाम अच्छे वैज्ञानी व देश के राष्ट्रपति बने। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गरीब परिवार से हैं लेकिन मेहनत व कड़ी तपस्या के बल शीर्ष पदों पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि आज समय बदल गया है। एक समय था जब बेटियां परिवार में बोझ लगती थीं। अब ऐसा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2015 में पानीपत से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाई मुहिम की शुरुआत की। नतीजतन समाज में जागरूकता और सरकार के प्रयासों से हरियाणा में लिंगानुपात में अपेक्षित सुधार हुआ है।
राजनीति चौधर के लिए नहीं
श्री कल्याण ने कहा कि उनके लिए राजनीति सेवा के लिए है, चौधर के लिए नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी यही संदेश है। पिछले 11 सालों में हलके में अनेक छोटे-बड़े विकास कार्यों को अंजाम दिया गया। एक समय था जब यमुना बेल्ट के गांवों की गलियों व रास्तों पर पैदल चलना भी दूभर था पर अब ऐसा नहीं है। इन गांवों