"दलित की जमीन चाहिए या कानून का डर खत्म हो गया? जमीन नहीं मिली तो सरिया-कुल्हाड़ी से हमला करने का आरोप" पैर तोड़ा,सिर फोड़ा
छतरपुर। जिले के मातगुवां थाना क्षेत्र के रसुईया तिराहे पर जमीन विवाद ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 3.30 एकड़ जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से कुछ दबंगों ने दलित परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया। घटना में धनीराम अहिरवार गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका जिला अस्पताल में उपचार जारी है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, बहादुर सिंह, शेलू सिंह और माधव सिंह परमार पर सरिया और कुल्हाड़ी से हमला करने का आरोप लगाया गया है। हमले में धनीराम के सिर, हाथ, कंधे और पैर में गंभीर चोटें आईं, जबकि उनकी मां टट्टू बाई अहिरवार भी हमले का शिकार हुईं।
धनीराम अहिरवार का कहना है कि उनकी सड़क किनारे स्थित 3 एकड़ 20 डिस्मल जमीन पर लंबे समय से दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि जमीन बेचने और छोड़ने के लिए लगातार परेशान किया जा रहा था। परिवार का कहना है कि उन्होंने साफ कर दिया था कि जमीन उनकी है और वे उसे न तो बेचेंगे और न किसी को देंगे। इसके बावजूद कथित रूप से दबाव और विवाद जारी रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पहले भी कई बार विवाद हो चुका था और शिकायतें की गई थीं, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था? क्या दलित परिवार की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया होता तो यह नौबत आती?
अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करती है। क्योंकि जब जमीन की लड़ाई में सरिया और कुल्हाड़ी चलने लगें, तो मामला सिर्फ विवाद नहीं बल्कि कानून के शासन की परीक्षा बन जाता है।
नोट: यह खबर पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मामले की जांच और पुलिस की आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Aug 4, 2026