सोन में 62 राउंड की ‘बालू वॉर’ : नाव पर रंगदारी लेने पहुंचे थे, पुलिस को देखते ही बरसा दीं 40 गोलियां
टॉप-10 वांटेड अनीश को पैर में लगी गोली, SI भी घायल. पुलिस की जवाबी फायरिंग में 22 राउंड चले; कार्बाइन-पिस्टल समेत 5 हथियार और 25 कारतूस बरामद
पटना/बिहटा, 30 अगस्त. सोन नदी में रविवार की सुबह सिर्फ गोलियां नहीं चलीं, बालू के उस काले खेल की पूरी तस्वीर सामने आई, जिसमें नाव रंगदारी का अड्डा और दियारा अपराधियों का ऑपरेशनल जोन बन जाता है. सुबह करीब 5:30 बजे पुलिस को सूचना मिली कि नदी के बीच नाव से बालू निकालने वाले मल्लाहों से अपराधी रंगदारी वसूल रहे हैं. पुलिस टीम पहुंची तो अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद नदी के बीच करीब 62 राउंड गोलियां चलीं.
पुलिस के मुताबिक अपराधियों ने करीब 40 राउंड, जबकि पुलिस ने जवाब में 22 राउंड फायर किए. मुठभेड़ में पटना पुलिस के टॉप-10 वांटेड अपराधियों में शामिल अनीश कुमार उर्फ अविनाश कुमार के पैर में गोली लगी. उसे PMCH में भर्ती कराया गया है. SI राजू कुमार सिंह के हाथ में गोली लगी, जबकि बिहटा SHO अमित कुमार के सिर में चोट आई है.
पुलिस ने मौके से पीयूष कुमार को गिरफ्तार किया. बाकी अपराधी नदी में कूदकर फरार हो गए. घटनास्थल से एक देसी राइफल, एक देसी कार्बाइन, दो देसी पिस्टल, एक कट्टा, 25 जिंदा कारतूस और अपराधियों की नाव बरामद हुई है.
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पहली सूचना से एनकाउंटर तक: रंगदारी की कॉल ने खोला ऑपरेशन
सुबह पुलिस को जानकारी मिली कि सोन के बीच अपराधियों का गैंग नाव पर पहुंचकर बालू निकालने वाले मल्लाहों से रंगदारी वसूल रहा है. सूचना को गंभीरता से लेते हुए स्पेशल टीम ने नदी में घेराबंदी की.
पुलिस के पहुंचते ही अपराधियों को शक हुआ. पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन जवाब में फायरिंग शुरू हो गई. नदी के बीच नाव पर मौजूद अपराधियों और पुलिस टीम के बीच सीधी मुठभेड़ शुरू हो गई.
कुछ ही देर में 62 राउंड फायरिंग ने पूरे ऑपरेशन का स्वरूप बदल दिया. पुलिस की कार्रवाई में अनीश घायल हुआ और पीयूष पकड़ा गया. बाकी अपराधी नदी में कूदकर निकल गए.
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अनीश पर गोली लगी, लेकिन निशाने पर पूरा गैंग
इस एनकाउंटर का सबसे बड़ा क्राइम एंगल अनीश की पहचान है. पुलिस रिकॉर्ड में अनीश कुमार उर्फ अविनाश कुमार का नाम टॉप-10 मोस्ट वांटेड अपराधियों में बताया गया है.
पुलिस के अनुसार, पिछले साल भी उसके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए थे और AK-47 बरामदगी का मामला सामने आया था. यानी रविवार को नदी में पकड़ा गया अपराधी कोई अचानक सामने आया हथियारबंद बदमाश नहीं, बल्कि पुलिस के रिकॉर्ड में पहले से गंभीर अपराधी के तौर पर दर्ज है.
यही वजह है कि अब जांच का फोकस सिर्फ एनकाउंटर तक सीमित नहीं रहेगा. पुलिस के सामने बड़ा सवाल है—अनीश के साथ नदी में मौजूद बाकी लोग कौन थे और सोन के बालू कारोबार में उसका नेटवर्क कितना बड़ा है?
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सोन का ‘पीला सोना’, जिसकी कीमत सिर्फ रुपये नहीं
सोन का बालू लंबे समय से अपराध के लिए बड़ा ट्रिगर रहा है. बालू की ऊंची कीमत ने नदी और दियारा क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई को जन्म दिया है.
यहां लड़ाई सिर्फ बालू निकालने की नहीं होती. किसकी नाव चलेगी, कौन बालू निकालेगा और किससे रंगदारी वसूली जाएगी—इसी वर्चस्व पर गैंग आमने-सामने आते हैं.
रविवार का एनकाउंटर इसी पैटर्न की तस्वीर दिखाता है. अपराधी नदी के बीच नाव पर पहुंचे. उनके पास एक-दो नहीं, बल्कि राइफल, कार्बाइन, पिस्टल और कट्टा जैसे कई हथियार थे. यानी यह सामान्य रंगदारी वसूली से ज्यादा हथियारबंद गैंग ऑपरेशन जैसा था.
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2022 का अमनाबाद-कटेसर कांड क्यों याद आया?
बिहटा के अमनाबाद-कटेसर इलाके में 2022 में बालू के वर्चस्व की लड़ाई खूनी हो चुकी है. चार लोगों की हत्या हुई थी और मौके से 500 से ज्यादा खोखे मिलने की बात सामने आई थी.
उस घटना और आज के एनकाउंटर के बीच एक पैटर्न साफ दिखता है—सोन का बालू जितना कीमती, उसका वर्चस्व उतना ही हिंसक.
आज फिर नदी के बीच गोलियां चलीं. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार पुलिस टीम सीधे गैंग के सामने थी.
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पुलिस के सामने अब ‘फरार नावों’ का सवाल
मुठभेड़ में एक अपराधी घायल हुआ और एक गिरफ्तार, लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती. कई अपराधी नदी में कूदकर फरार हो गए.
इसलिए पुलिस का अगला ऑपरेशन सिर्फ घटनास्थल की जांच नहीं, बल्कि फरार गैंग की तलाश है. सोन नदी में नावों की चेकिंग शुरू कर दी गई है. STF और BSAP को भी बिहटा भेजा गया है.
पुलिस अब यह खंगाल रही है कि घटनास्थल पर कितने लोग थे, फरार अपराधी किस दिशा में निकले और उनके पास मौजूद हथियारों का स्रोत क्या है.
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62 राउंड का मतलब क्या?
रविवार की घटना को सिर्फ एक पुलिस एनकाउंटर मानना सोन के क्राइम पैटर्न को छोटा करके देखना होगा.
40 राउंड अपराधियों की ओर से और 22 राउंड पुलिस की ओर से—कुल 62 राउंड.
इन 62 गोलियों के पीछे एक ऐसा क्राइम इकोसिस्टम दिखाई देता है, जहां बालू → नाव → रंगदारी → हथियार → गैंगवार एक-दूसरे से जुड़े हैं.
अनीश घायल होकर पुलिस की गिरफ्त में है. पीयूष पकड़ा जा चुका है. लेकिन नदी में कूदकर फरार हुए बाकी अपराधी इस कहानी का अगला चैप्टर हैं.
सोन में आज पुलिस ने सिर्फ एक अपराधी को गोली लगने के बाद पकड़ा नहीं है. उसने बालू के उस गैंग नेटवर्क पर हाथ डाला है, जो नदी के बीच नाव को अपना ‘क्राइम जोन’ बनाकर रंगदारी वसूल रहा था. अब असली परीक्षा एनकाउंटर के बाद शुरू होगी—क्या पुलिस अनीश से आगे बढ़कर उस पूरे नेटवर्क तक पहुंच पाती है?