टाटीझरिया: डहरभंगा के पांकर-पीपल पर आखिरी सांसें गिन रहे बादुर, शाम ढले अब नहीं गूंजती बादुर की सरसराहट
डहरभंगा के पांकर-पीपल पर आखिरी सांसें गिन रहे बादुर, शाम ढले अब नहीं गूंजती बादुर की सरसराहट। नई पीढ़ी पहचानती नहीं, पुरानी पीढ़ी बचाने को बेताब; विलुप्ति के कगार पर यह दुर्लभ जीव। बदलते पर्यावरण और इंसानी लालच के कारण एक अनोखा पारिस्थितिक आशियाना उजड़ने की कगार पर है। इलाके में कभी हजारों की तादाद में रहने वाले दुर्लभ बादुर आज अपनी आखिरी सांसे गिन रहा है।