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भिवानी का गौरव बढ़ाएंगे रक्तवीर राजेश डुडेजा, अहमदाबाद में होगा राष्ट्रीय सम्मान 97 बार रक्तदान, 49 बार प्लेटलेट्स दान और हजारों जिंदगियां बचाने का मिशन, भारत सरकार के मानकों पर सहारा चेरिटेबल ट्रस्ट का हुआ चयन भिवानी, 14 जून : रक्तदान महादान है, यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि भिवानी के शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा के जीवन का परम संकल्प बन चुका है। पिछले कई दशकों से जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध करवाने और समाज को इस पुनीत कार्य के प्रति जागरूक करने वाले राजेश डुडेजा को अब राष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ा सम्मान मिलने जा रहा है। विश्व रक्तदाता दिवस के उपलक्ष्य में 16 जून को गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित होने वाले नेशनल लेवल एनजीओ कन्कलेव ऑन ब्लड ट्रांसफ्यूशन सर्विसमें भिवानी के 'हारा चेरिटेबल ट्रस्ट को भारत सरकार के कड़े मानकों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान के लिए चुना गया है। यह कार्यक्रम भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद तथा रक्त संक्रमण सेवाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। हरियाणा स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल पंचकूला द्वारा सहारा चेरिटेबल ट्रस्ट को इस राष्ट्रीय समागम में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। अहमदाबाद के सिल्वर क्लाउड होटल एंड बैंक्वेट्स में होने वाले इस गरिमामयी समारोह में देशभर की चुनिंदा और उत्कृष्ट रक्त सेवा संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। सहारा चेरिटेबल ट्रस्ट को रक्तदान एवं रक्त संक्रमण सेवाओं के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए अद्वितीय और उत्कृष्ट योगदान के लिए इस सम्मान से नवाजा जा रहा है। इस राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञ, प्रतिष्ठित रक्तदाता संगठन, बड़े एनजीओ और स्वास्थ्य क्षेत्र के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस वैश्विक पटल पर भिवानी की इस संस्था के कार्यों की बकायदा प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जहां भिवानी निवासी शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा अपने अनुभवों को देश के सामने साझा करेंगे। गुजरात स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल द्वारा इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले विशिष्ट अतिथियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। भिवानी के प्रेस फोटोग्राफर राजेश डुडेजा ने समाजसेवा और रक्तदान को अपनी सांसों में बसा लिया है। उनके इस सफर की शुरुआत साल 1995 में आई भीषण बाढ़ के दौरान हुई थी, जब उन्होंने पहली बार बाढ़ पीडि़तों की सहायता के लिए रक्तदान किया था। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। आज स्थिति यह है कि वे स्वयं 97 बार स्वैच्छिक रक्तदान कर चुके हैं। 49 बार गंभीर मरीजों के लिए प्लेटलेट्स दान कर चुके हैं। हजारों जरूरतमंदों तक आपातकाल में रक्त पहुंचाने में सीधे तौर पर सहयोगी रहे हैं। हजारों स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन उनके सक्रिय नेतृत्व में हो चुका है। राजेश डुडेजा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे रक्त की गुहार लगाने वाले किसी भी व्यक्ति की जाति, धर्म, पहचान या रिश्तेदारी नहीं देखते। उनके लिए संकट में फंसा इंसान और उसकी जिंदगी ही सबसे बड़ा परिचय है। राजेश डुडेजा के सेवा भाव और उनके जुनून का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अकेले भिवानी ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में हजारों रक्तदाताओं का एक अभेद्य नेटवर्क तैयार कर दिया है। वर्तमान में उनकी टीम से 5 हजार से अधिक सदस्य सीधे जुड़े हुए हैं, जिनमें से लगभग 3 हजार सक्रिय रक्तदाता हैं। चाहे गर्भवती महिलाएं हों, थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चे हों, सडक़ दुर्घटना के शिकार लोग हों या फिर वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे गंभीर मरीज, राजेश डुडेजा की यह लाइफ-सेविंग आर्मी चौबीसों घंटे तत्पर रहती है। एक फोन कॉल पर रक्तदाता सीधे अस्पताल पहुंच जाते हैं। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के उस खौफनाक दौर को कोई नहीं भूल सकता, जब लोग अपनों के पास जाने से कतरा रहे थे और अस्पतालों में रक्त की भारी किल्लत हो गई थी। उस दौर में भी राजेश डुडेजा ने मानवता की अद्भुत मिसाल पेश की। वे लॉकडाउन के कड़े नियमों के बीच स्वयं अपने वाहन से रक्तदाताओं को उनके घरों से सुरक्षित अस्पताल लेकर आते थे, रक्तदान करवाते थे और फिर ससम्मान उन्हें उनके घरों तक छोडक़र आते थे ताकि किसी भी मरीज की जान रक्त के अभाव में न जाए। राजेश डुडेजा की इस निस्वार्थ और अटूट मानवीय सेवा को देखते हुए उन्हें देश और प्रदेश की कई महान विभूतियों द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया जा चुका है। वे पूर्व में राष्ट्रीय स्तर की तीन महत्वपूर्ण कार्यशालाओं ौर सेमिनारों में भी हिस्सा ले चुके हैं। उन्हें सम्मानित करने वालों में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, पूर्व महामहिम राज्यपाल धनिक लाल मण्डल, पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी रहे। यूं तो सहारा चेरिटेबल ट्रस्ट भिवानी के अध्यक्ष पद की कमान जगदीश मिताथल संभाल रहे हैं और उनके मार्गदर्शन में संस्था निरंतर आगे बढ़ रही है, लेकिन इस संस्था की मजबूत रीढ़ राजेश डुडेजा ही हैं। ट्रस्ट के महासचिव के रूप में संस्था के अधिकांश सामाजिक सरोकार, रक्तदान मुहिम और जनसेवा के कार्यों का धरातल पर संचालन राजेश डुडेजा के ही कुशल नेतृत्व में किया जाता है। इस मौके पर राजेश डुडेजा ने स्वास्थ्य विभाग एसीएस सुमित्रा मिश्रा का विशेष आभार प्रकट किया तथा युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि रक्तदान करने से आपकी सेहत को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि आपके इस छोटे से प्रयास से किसी तड़पते हुए इंसान को नया जीवन मिल जाता है। इस दुनिया में किसी को जीवनदान देने से बड़ा कोई दान नहीं है। मैं युवाओं से अपील करता हूं कि वे नशे और अन्य बुराइयों से दूर रहकर नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करें और मानवता के इस महायज्ञ में अपनी आहुति दें।

Bhiwani, Bhiwani | Jun 14, 2026

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कानून ने पत्नी माना, इसलिए ₹21 लाख का चेक मिल गया .. अब चर्चा इस बात की है कि पत्नी का अधिकार मिला तो क्या पत्नी का फर्ज भी निभाया गया ..?

असम के जोरहाट में पिछले दिनों भारतीय वायुसेना का विमान क्रैश हुआ .. पांच जवान शहीद हुए, इनमें फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार भी थे .. बिहार सरकार की तरफ से 21 लाख रुपए का चेक श्रेया राय को सौंपा गया .. श्रेया श्राद्धकर्म से पहले ही चेक लेकर अपने घर चली गई ..

दरअसल, शुभम और श्रेया की अगले साल शादी होनी थी .. लेकिन दोनों अपने-अपने घर वालों से छुपा कर कोर्ट मैरिज कर चुके थे, यह जानकारी शुभम की फैमिली को नहीं थी .. इसलिए कानूनन तौर पर सरकार ने श्रेया को शुभम की पत्नी मानकर सहायता दी ..

शुभम के पिता अमरेंद्र शर्मा कहते हैं, "अगर मेरे बेटे ने सच में श्रेया से शादी की थी तो वह मेरी बहू है और चेक पाने की हकदार भी, लेकिन पत्नी का फर्ज निभाना भी तो चाहिए था .. पति के श्राद्धकर्म से पहले ही वो चेक लेकर अपने घर चली गई .."

चेक देने से पहले श्रेया के डॉक्यूमेंट देखे थे जिसमें पति का नाम हो।

जिन माता पिता ने पाला पोसा जिनके घर का चिराग चला गया  उनको क्या मिला ।

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Bhiwani, Bhiwani | Jun 19, 2026

रणथंभौर में मगरमच्छ से गाय को छुड़ाने शाहिद ने दिखाई हिम्मत....
रणथंभौर में होटल के पास स्थित तालाब में पानी पीने गई एक गाय को मगरमच्छ ने पकड़ लिया। मौके पर मौजूद लोग सहम गए, लेकिन होटल में कार्यरत शाहिद ने अपनी जान की परवाह किए बिना साहस दिखाया और कड़ी मशक्कत के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। शाहिद की बहादुरी और इंसानियत को सलाम।" 🐄

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Bhiwani, Bhiwani | Jun 19, 2026