🚨तमिल फिल्म इंडस्ट्री की उत्तराखंड में शूटिंग को लेकर बढ़ी रुचि
चेन्नई। इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ में उत्तराखंड की फिल्म नीति और प्रदेश की शूटिंग लोकेशंस को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इस दौरान तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कई प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स ने उत्तराखंड में फिल्मांकन को लेकर रुचि दिखाई।
कॉन्क्लेव में देश-विदेश के फिल्ममेकर्स, प्रोड्यूसर्स और फिल्म कमीशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने राज्य की फिल्म नीति, शूटिंग सुविधाओं और विभिन्न लोकेशंस की जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए फिल्म नीति के तहत निर्माताओं को सुविधाएं दी जा रही हैं। हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए 3 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है। वेब सीरीज और विदेशी फिल्मों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया गया है।
शूटिंग की अनुमति के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया और सिंगल विंडो सिस्टम लागू है, जिसके तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सात दिनों के भीतर अनुमति देने की व्यवस्था है। शूटिंग शुल्क में छूट के साथ सुरक्षा व्यवस्था और GMVN-KMVN गेस्ट हाउसों में विशेष रियायतें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कॉन्क्लेव के दौरान इंडिया टॉकीज, स्टोन बीच स्टूडियो, बीटीजीआई प्रोडक्शंस, पारसा पिक्चर, लाइका प्रोडक्शंस, मसाला पिक्स, कवि क्रिएशन्स और ड्रीम वारियर पिक्चर्स समेत कई प्रोडक्शन हाउस के प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें हुईं। इन प्रोडक्शन हाउसों ने उत्तराखंड में शूटिंग की संभावनाओं में रुचि दिखाई।
राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, विविध भौगोलिक परिस्थितियों और सांस्कृतिक विरासत को फिल्म निर्माण से जोड़कर प्रदेश को एक प्रमुख फिल्म शूटिंग और फिल्म टूरिज्म हब के रूप में विकसित करना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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