श्रीनगर में श्री आदर्श रामलीला का भव्य शुभारंभ, बारिश के बावजूद दर्शकों से भरा रहा पंडाल
130 वर्ष पुरानी रामलीला परंपरा के 127वें मंचन का आगाज, राम जन्म से ताड़का वध तक के प्रसंगों ने मोहा मन
श्रीनगर (गढ़वाल), 11 अक्टूबर। श्रीनगर गढ़वाल में श्री आदर्श रामलीला समिति की ओर से शारदीय नवरात्र के उपरांत आयोजित रामलीला के 127वें मंचन का रविवार को भव्य शुभारंभ हुआ। श्री कमलेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित रामलीला के पहले दिन कैलाश लीला, राम जन्म, ताड़का वध, मारीच तारण और सुबाहु वध के प्रसंगों का मंचन किया गया। बारिश के बावजूद रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे और पंडाल दर्शकों से भरा रहा।
कार्यक्रम में कमलेश्वर मंदिर के महंत आशुतोष पुरी और श्रीनगर नगर निगम की मेयर आरती भंडारी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। समिति के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने अतिथियों का भगवान राम के दरबार में शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। मुख्य अतिथियों ने भगवान श्रीराम से सभी के मंगल की कामना करते हुए समिति के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने रामलीला के मंचन को हर वर्ष और अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की।
शिव-पार्वती संवाद और राम जन्म के प्रसंगों ने मोहा मन
पहले दृश्य में माता पार्वती द्वारा भगवान शिव से श्रीराम कथा सुनाने का आग्रह करने और भगवान शिव द्वारा रामकथा का वर्णन शुरू करने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इसके बाद रावण, कुंभकर्ण और विभीषण द्वारा ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने की लीला का मंचन हुआ।
अगले दृश्य में नारद मुनि द्वारा रावण को उकसाने, रावण के कैलाश पर्वत उठाने का प्रयास करने और भगवान शिव द्वारा उसे दंडित किए जाने के प्रसंग ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद राजा दशरथ की व्यथा और भगवान श्रीराम के जन्म के मार्मिक दृश्य का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
ताड़का वध के साथ प्रथम दिवस की लीला संपन्न
रामलीला के अंतिम दृश्य में भगवान श्रीराम द्वारा ताड़का वध, मारीच को सात समुद्र पार पहुंचाने तथा लक्ष्मण द्वारा सुबाहु वध के प्रसंगों का मंचन किया गया। इसके बाद भगवान श्रीराम की आरती के साथ प्रथम दिवस की लीला का समापन हुआ। प्लेबैक में वसुधा और प्रिया की जोड़ी ने अपनी प्रस्तुति से भक्तिमय वातावरण बनाया।
स्थानीय कलाकार निभा रहे हैं प्रमुख भूमिकाएं
रामलीला में भगवान शिव की भूमिका हरीश पुरी, माता पार्वती की भूमिका आरुषि डोभाल, रावण की भूमिका विजय मोहन उनियाल, श्रीराम की भूमिका अभिषेक रावत और लक्ष्मण की भूमिका पवन जोशी निभा रहे हैं। गुरु विश्वामित्र की भूमिका अनमोल काला, नारद की भूमिका राघव जोशी, मारीच की भूमिका आकाश, ताड़का एवं कुंभकर्ण की भूमिका मनीष बडोनी और सुबाहु की भूमिका अंकित रावत निभा रहे हैं।
इसके अलावा दशरथ की भूमिका मुकेश सेमवाल, विभीषण की भूमिका सुधीर डंगवाल, भरत की भूमिका कन्हैया, शत्रुघ्न की भूमिका अंश बडोनी, श्रृंगी ऋषि की भूमिका सागर अग्रवाल, कौशल्या की भूमिका गीता नेगी, सुमित्रा की भूमिका जयंती और कैकेयी की भूमिका शशि निभा रही हैं।
संगीत निर्देशन वीरेंद्र रतूड़ी कर रहे हैं। तबले पर राजमोहन कंडवाल, कीबोर्ड पर जगमोहन कंडवाल एवं प्रकाश पोखरियाल और ढोलक पर शिवलाल संगत दे रहे हैं। ओक्टापैड पर संजय पांडे हैं। प्रकाश एवं विद्युत व्यवस्था की जिम्मेदारी हरीश मिश्रा और देशराज संभाल रहे हैं, जबकि मंच व्यवस्था प्रमोद कुमार तथा मेकअप की जिम्मेदारी इनकुश मेहता के पास है।
समिति के अध्यक्ष देवेंद्र मणि मिश्रा, संरक्षक बुद्धिबल्लभ उनियाल एवं दिनेश असवाल, उपाध्यक्ष विजय रावल एवं आशीष उनियाल, सचिव हिमांशु अग्रवाल और कोषाध्यक्ष संजय जैन सहित समिति के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
समिति ने नगरवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर रामलीला के 127वें मंचन का आनंद लें और इस ऐतिहासिक परंपरा को यादगार बनाने में सहयोग करें।