डॉक्टरी की आड़ में अराजकता! संजय गांधी अस्पताल को जूनियर डॉक्टरों ने किया बदनाम, बात-बात पर मारपीट और हड़ताल क्यों?
संजय गांधी अस्पताल का नाम बदनाम कर दिया है जूनियर डॉक्टरों ने, हमेशा अराजकता मरीजों से अभद्रता, अटेंडरों को दबाने धमकाने का काम किया जाता है
रीवा के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल (SGMH) में आधी रात को एक बार फिर भारी हंगामा और तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। सर्जरी विभाग के आईसीयू वार्ड में मरीज के अटेंडरों और जूनियर डॉक्टरों (JUDA) के बीच हुई तीखी बहस मारपीट में बदल गई। घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों ने तत्काल प्रभाव से काम बंद कर दिया और अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए।
आधी रात को हंगामा और कामकाज ठप
मिली जानकारी के अनुसार, घटना देर रात सर्जरी विभाग के आईसीयू (ICU) वार्ड की है। बताया जा रहा है कि एक मरीज के चार परिजन कथित तौर पर शराब के नशे में वार्ड के अंदर दाखिल हुए। किसी बात को लेकर वहां तैनात ऑन-ड्यूटी महिला डॉक्टर और जूनियर डॉक्टरों के साथ उनका विवाद हो गया, जिसके बाद अटेंडरों ने हाथापाई और मारपीट शुरू कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने काम पूरी तरह ठप कर दिया और अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए। डॉक्टरों का आरोप है कि आपातकालीन स्थिति में भी अस्पताल प्रबंधन, वरिष्ठ डॉक्टर और सीएमओ (CMO) मौके पर मौजूद नहीं थे, जिससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
डॉक्टरों का छलका दर्द: "हम 24 घंटे जागते हैं, फिर भी पीटते हैं"
धरने पर बैठे जूनियर डॉक्टरों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। डॉक्टरों का कहना है:
"हम मरीजों की जान बचाने के लिए 24 घंटे जागकर सातों दिन काम करते हैं। कई बार नहाने तक का समय नहीं मिलता, लेकिन इसके बावजूद हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाता है। जब तक हमें ठोस सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक हम काम पर वापस नहीं लौटेंगे।"
डॉक्टरों ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन और कलेक्टर द्वारा पूर्व में दी गई समझाइश के बावजूद अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया है।
टीआई और डीन की समझाइश के बाद काम पर लौटे डॉक्टर
घटना की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय थाना पुलिस (TI) और अस्पताल प्रशासन मौके पर पहुंचा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संजय गांधी अस्पताल के डीन, अधीक्षक और वरिष्ठ सर्जन डॉ. पुष्पेंद्र शुक्ला ने आक्रोशित जूनियर डॉक्टरों से वार्ता की।
पुलिस और अस्पताल प्रबंधन द्वारा आरोपियों के खिलाफ सख्त एफआईआर (FIR) दर्ज करने और सुरक्षा बढ़ाने के आश्वासन के बाद जूनियर डॉक्टरों ने अपना धरना समाप्त किया और वापस काम पर लौटे।
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