आसान नहीं होता 26 दिनों तक भूखा रहना। यह सिर्फ एक अनशन नहीं, बल्कि अपने विचारों और मांगों के लिए किया गया कठिन संघर्ष था।
सोनम वांगचूक ने अनशन तोड़कर एक व्यावहारिक और जिम्मेदार फैसला लिया। क्योंकि किसी भी लंबी लड़ाई को लड़ने के लिए सबसे पहले खुद का ज़िंदा और स्वस्थ रहना ज़रूरी होता है। अगर इंसान ही नहीं रहेगा, तो संघर्ष को आगे कौन बढ़ाएगा?
अक्सर किसी के चले जाने के बाद श्रद्धांजलि देने वालों की कमी नहीं होती, लेकिन न्याय की लड़ाई में सबसे ज़्यादा ज़रूरत उन लोगों की होती है जो ज़िंदा रहकर आवाज़ उठाते रहें, लोगों को जोड़ते रहें और बदलाव के लिए लगातार प्रयास करते रहें।
संघर्ष का उद्देश्य खुद को खत्म करना नहीं, बल्कि अपनी बात को समाज और सत्ता तक पहुँचाना होता है। इसलिए कई बार पीछे हटना हार नहीं, बल्कि आगे की लड़ाई के लिए खुद को तैयार करना होता है।
आख़िरकार, न्याय की हर लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार जीवित रहकर, डटे रहकर और लगातार प्रयास करते रहना ह�
Korba, Korba | Jul 24, 2026