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विश्व पर्यावरण दिवस पर तांदी बाँध संघर्ष समिति ने चिनाब-व्यास लिंक परियोजना के खिलाफ फूंका विरोध का बिगुल Kullu Times विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर तांदी बाँध संघर्ष समिति ने जनजाति जिला लाहुल-स्पीति के कोकसर में प्रस्तावित चिनाब-व्यास (चंद्रा-व्यास) लिंक परियोजना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करते हुए एक वीडियो जारी किया है। समिति ने इस परियोजना की टेंडर प्रक्रिया, पारदर्शिता और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति के अध्यक्ष विनोद लारजे ने कहा कि चिनाब-व्यास लिंक जैसी परियोजना संवेदनशील उच्च हिमालयी शीत मरुस्थल लाहुल और ब्यास नदी घाटी के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हो सकती है। उनका कहना है कि प्रस्तावित बाँध स्थल कोकसर के आसपास स्थित संवेदनशील ग्लेशियर क्षेत्रों में सुरंग निर्माण और भारी ब्लास्टिंग से प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने, भूस्खलनों में वृद्धि तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के गंभीर रूप से प्रभावित होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि तांदी बाँध संघर्ष समिति और स्थानीय समुदाय इस परियोजना का पुरजोर विरोध करते हैं। समिति के उपाध्यक्ष अरुण राणा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मानसून के दौरान ब्यास नदी घाटी में जिस प्रकार की आपदाएँ और तबाही देखने को मिली हैं, उसके मद्देनज़र चिनाब-व्यास लिंक परियोजना स्थिति को और अधिक गंभीर बना सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि स्थानीय जनता की चिंताओं और आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया तो पूरी लाहुल घाटी में व्यापक जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा। समिति के सचिव विक्रम कटोच ने कहा कि वर्ष 2019 में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चिनाब नदी घाटी का संचयी पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (Cumulative Environment Assessment) कराया गया था। आश्चर्यजनक रूप से उस रिपोर्ट में चिनाब-व्यास लिंक जैसी बड़ी परियोजना का कोई उल्लेख नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि बिना किसी व्यापक और समग्र पर्यावरणीय मूल्यांकन के इस परियोजना को आगे बढ़ाना पूरी चिनाब नदी घाटी के लिए जोखिमपूर्ण है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस परियोजना का प्रभाव उन परियोजनाओं (उठाऊ सिंचाई जल परियोजना या जल विद्युत परियोजना) पर क्या पड़ेगा जो वर्तमान में संचालित हैं या प्रस्तावित हैं, इसका कोई समग्र अध्ययन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में परियोजना को आगे बढ़ाना जल्दबाजी प्रतीत होता है। समिति का आरोप है कि स्थानीय पंचायतों, ग्राम सभाओं और प्रभावित समुदायों को विश्वास में लिए बिना तथा किसी खुली जन-सुनवाई के बिना परियोजना प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन, ग्राम सभा की भूमिका तथा पेसा (PESA) और वन अधिकार अधिनियम (FRA) की संवैधानिक भावना के विपरीत है। तांदी बाँध संघर्ष समिति ने मांग की है कि परियोजना से जुड़े सभी दस्तावेज़, अध्ययन और निर्णय प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए तथा स्थानीय समुदायों की सहमति और भागीदारी सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई न की जाए।

Kullu, Kullu | Jun 5, 2026

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