#प्रभु_की_लीला_प्रभु_ही_जाने..
भरतपुर। झारखंड के बोकारो निवासी परशुराम महतो की 20 साल पुरानी कहानी आखिरकार एक भावुक सुखद अंत तक पहुंच गई, जहां पत्नी मालती की अटूट आस्था और इंतजार की जीत हुई। दो दशक पहले काम की तलाश में मुंबई गए परशुराम जब घर नहीं लौटे तो पूरे परिवार ने उन्हें मृत मान लिया था। हालांकि, उनकी पत्नी ने कभी अपना सुहाग नहीं त्यागा, न ही दूसरी शादी की और वे हर साल पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती रहीं। मानसिक संतुलन खो चुके परशुराम को मार्च 2024 में कुचामन से रेस्क्यू कर भरतपुर के 'अपना घर आश्रम' लाया गया था। वहां उचित इलाज के बाद जब उनकी याददाश्त लौटी और उन्होंने अपने गांव का पता दिया, तब आश्रम की पहल से उनके परिजनों को सूचना दी गई। 20 साल बाद जब भाई और जीजा उन्हें आश्रम से लेने पहुंचे तो आंखें छलक उठीं। मालती की सालों पुरानी आस सच साबित हुई और मृत मान लिया गया सुहाग जिंदा लौट आया।
Bharatpur, Bharatpur | Aug 10, 2026