🪔दीवाली🪔
उत्सव - दीपों वाली
दीपावली दीपोत्सव है,हर घर में दीप जलाये जाते है।
घी से
तेल से
दीप जलाये जाते है।
आइए आज दीप के महत्व को समझते है।
दीप
जो खुद जलता है और प्रकाश देता है।
दीपक
पंचमहाभूत व्यवस्था की एक पूर्ण इकाई है।
🪔दीपक की मिट्टी भूमि महाभूत है।
🪔मिट्टी का आकार गगन महाभूत है।
🪔जला हुआ घी वायु महाभूत है।
🪔जलता हुआ लौ अग्नि महाभूत है।
🪔तेल या घी जल महाभूत है।
दीपक के जलने से पंच महाभूतों की पांचों तृण मात्राएं प्रकट होती है
रूप
रंग
गंध
स्वर
स्पर्श
इन्हीं तृणमात्राओं से पूरी जड़ प्रकृति बनी है।
🌼भूमि का रूप माता तत्व है
🌼गगन का रंग पिता तत्व है
🌼वायु का गंध प्राण तत्व है
🌼अग्नि का स्वर स्फूर्ति तत्व है
🌼नीर का स्पर्श जीवन तत्व है।
इस जड़ प्रकृति में चेतना भरने का कार्य 3ऊर्जाएं करती है
🌼ब्रह्म ऊर्जा (ऊपर का आकार बनाता है)
🌼शिव ऊर्जा (अंदर का आकार बनाता है)
🌼विष्णु ऊर्जा (प्राण का आकार=अहमSकार=डीएनए का आकार बनाता है)
ब्रह्म ऊर्जा जिसे इलेक्ट्रॉन कहा गया,जो अणु को आकार देता है, कार्बन श्रृंखला के आकार से ही सजीव शरीर जन्म लेता है
विष्णु ऊर्जा आवेश है जो अणुओं के आकार में प्राण का संचार करता है, डीएनए 🧬 का निर्माण करता है।
शिव ऊर्जा प्रकाश है, ज्योतिर्लिंग है,ज्योति स्वरूप है जो पूरे शरीर का निर्माण करती है।
सब कुछ प्रकाश से ही बना है कैसे
इसे समझने के लिए पौधों के प्रकाश संश्लेषण को समझना पड़ेगा।
पत्तियों के अंदर जिस प्रकाश का संश्लेषण होता है वह प्रकाश का सप्त रंग फोटॉन है,जिसके संश्लेषण से दो चीजें बनती है।
6CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड) + 6H₂O (पानी) + प्रकाश ऊर्जा → C₆H₁₂O₆ (ग्लूकोज) + 6O₂ (ऑक्सीजन)
सूर्य के प्रकाश के संश्लेषण से दो चीजें निकलती है, ग्लूकोश और ऑक्सीजन,
ग्लुकोस को पौधा अंदर कर लेता है और ऑक्सीजन को बाहर छोड़ देता है।
अंदर लिए हुए ग्लूकोश से ही पौधे का तना भी बनता है फूल बनता है,फल भी बनता है।
अर्थात
प्रकाश के सात रंग फोटान (शिव ऊर्जा) से ही पूरा पौधा बनता है,इससे निकले ऑक्सीज़न ही सबका प्राणवायु बनता है
आप जो अनाज खा रहे है, फल खा रहे है यह सब सूर्य प्रकाश का फोटॉन कण (शिव ऊर्जा)ही खा रहे है। पत्ता भी सूर्य प्रकाश से बना है,पत्ते खाने वाले शाकाहारी जीव भी सूर्य प्रकाश ही खा रहे है,मांस खाने वाले मांसाहारी जीव भी सूर्य प्रकाश ही खा रहे है।
इस प्रकृति का सब कुछ सूर्य प्रकाश से ही बना है।
सात रँग का विज्ञान
प्रकाश के ये सात रंग इलेक्ट्रॉन के अपनी नाभिकीय कक्षा के अंदर कूदने से निकलता है,
छठी कक्षा से दूसरी कक्षा में आने पर बैगनी रंग
पांचवीं कक्षा से दूरी कक्षा में आने से हरा रंग
चौथी कक्षा से दूसरी कक्षा में आने से नीला रंग
तीसरी कक्षा से दूसरी कक्षा में आने पर पीला रंग निकलता है।
यह रंग (फोटान)ही है शिव ऊर्जा
इस रंग को आधुनिक विज्ञान फोटॉन कण कहता है।
इन्हीं प्रकाश की एक छोटी इकाई दीपक है।
दीपक को ध्यान से देखिए उसके कोर से बाहर आते तक सप्त रंग की लौ दिखती है।
यह शिव ऊर्जा का सप्त प्रस्फुटिकरण है।
घी के जलने से निकला प्रकाश फोटॉन कण शिव ऊर्जा है।
घी के जलने से निकला एक प्रकार का आवेश "अयन" (जो दिखाई नहीं देता) ही नारायण ऊर्जा है।
नर+अयन (नारायन)
यह एक आवेश है
दिखाई नहीं देता है पर क्रियाशील है,यह प्राण ऊर्जा है।
शिव ऊर्जा निर्माण ऊर्जा है
विष्णु ऊर्जा प्राण ऊर्जा है
ब्रह्म ऊर्जा आकार ऊर्जा है
तीनों ऊर्जा का संकलित स्वरूप ओंकार ऊर्जा है।
प्रकृति की पहली कृति ओंकार है।
दीपक से
इससे निकला इलेक्ट्रॉन यानी ब्रह्म ऊर्जा परमाणुओं के अष्टक को पूर्ण करता है।
अर्थात
दीपक प्रकृति बनाने वाले अष्ट वसु
⭐भूमि
⭐गगन
⭐वायु
⭐अग्नि
⭐नीर
🌼शिव
✨विष्णु
⚡ब्रह्म
को प्रकट करता है।
इसीलिए दीपक का त्राटक योग भी किया जाता है,लागतार दीपक को देखकर ध्यान की उस मूल इकाई को देखना
जो दिव्य ज्योति है,
परम ज्योति तक पहुंचने का अभ्यास त्राटक है।
आज कार्तिक अमावस्या है,आज के ही दिन महालक्ष्मी प्रकट हुई
इस दिन
दीपक जलाकर इन अष्ट वसुवों का प्रकटोत्सव मनाएं।
TCBT में मैने आपको बहुत से ऑनलाइन ऑफलाइन प्रशिक्षण में प्रार्थना का महत्व बताया ही है।
आज महालक्ष्मी की प्रार्थना करें।
गूगल से श्री सूक्त लिखकर सर्च करें
दीपक जलाकर
अष्ट वसुओ का आह्वाहन करे
फिर
पूर्ण शुद्धता से श्री सूक्त का पाठ करें
संस्कृत पाठ निम्न है
https://youtu.be/lyonVs2PgCk?si=wd-HMKiRzF0iDLsT
हिंदी पाठ निम्न है
https://youtu.be/AgMUY3hpVPc?si=qNOjXGvj4bkbfNxq
🙏
ताराचंद बेलजी
प्रवर्तक
पंच महाभूत कृषि
प्राध्यापक
प्राकृतिक खेती
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर