बास्तानार: लाल आतंक का अंत, ककनार घाटी के सुदूर गाँवों तक पहुँची ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा’ की सौगात
बस्तर की जिन दुर्गम पहाड़ियों, संकरी पगडंडियों और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर कभी बारूद की गंध और लाल आतंक का खौफ हुआ करता था, आज वहाँ विकास की एक ऐसी नई इबारत लिखी गई है जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन मानी जाती थी। बस्तर की कठिन भौगोलिक विषमताओं और माओवाद के साये को पीछे छोड़ते हुए ककनार घाटी के नीचे बसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्र आज विकास जुड़ चुका है