बेतिया के मझौलिया थाना क्षेत्र में जमीन विवाद को लेकर डॉ. राहुल ने दूसरे पक्ष पर जबरन कब्जा, निर्माण और धमकी देने का आरोप लगाया है। डॉ. राहुल के अनुसार, विवादित जमीन का घटनाक्रम वर्ष 1991 से शुरू होता है, जब उनके दादा जी ने जमीन अपने नाम पर लिखवाई थी। उनके पास उस जमीन की रसीद मौजूद है। डॉ. राहुल का कहना है कि इस वर्ष की रसीद भी उनके पास है। इसके बाद साधु शरण उपाध्याय, नीरज उपाध्याय, नीपू उपाध्याय और शशि भूषण उपाध्याय जमीन खरीदने के लिए उनके पास आए। डॉ. राहुल के अनुसार, सौदे के दौरान दूसरे पक्ष ने चार लाख रुपये एडवांस दिए और जमीन से संबंधित कागजात अपने पास ले लिए। आरोप है कि बाद में उन्हीं कागजात में छेड़छाड़ कर जमीन को ललन उपाध्याय के नाम से अपने नाम पर लिखवा लिया गया। डॉ. राहुल के मुताबिक, इसके बाद दूसरे पक्ष ने जमीन खरीदने से इनकार कर चार लाख रुपये वापस मांगे। उन्होंने रकम वापस कर दी। इसके बाद विवादित जमीन को कथित तौर पर जबरन घेर लिया गया। डॉ. राहुल का आरोप है कि जब वह और उनके परिवार के लोग जमीन पर जाते थे तो उन्हें वहां से भगा दिया जाता था और मारपीट तथा फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती थी। विवाद बढ़ने के बाद डॉ. राहुल ने एसडीएम कोर्ट का रुख किया। उनके अनुसार, एसडीएम कोर्ट द्वारा विवादित जमीन पर धारा 144 लागू की गई। इसके बावजूद जमीन पर निर्माण कार्य जारी रखने का आरोप उन्होंने दूसरे पक्ष पर लगाया है। डॉ. राहुल ने बताया कि बाद में मझौलिया थाना पुलिस के सहयोग से जब वह जमीन पर पहुंचे तो प्रशासन के साथ भी दूसरे पक्ष द्वारा अभद्रता और दुर्व्यवहार किया गया। इसके बाद उन्होंने अंचल अधिकारी, मझौलिया थाना समेत संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की। डॉ. राहुल का दावा है कि करीब एक वर्ष से वह विभिन्न अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर जमीन पर कथित निर्माण और कब्जे को लेकर उचित कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
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