अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के पहले दिन भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथयात्रा और शाम की आरती के बाद, अगले दिन (उत्सव के दूसरे दिन) से ढालपुर मैदान के अस्थायी शिविरों में कई खास और महत्वपूर्ण धार्मिक व सांस्कृतिक गतिविधियां शुरू हो जाती हैं:
देवी-देवताओं के दर्शन और मेल-मिलाप: रथयात्रा के बाद अगले दिन से ढालपुर मैदान में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए घाटी के सैकड़ों देवी-देवताओं तथा भगवान रघुनाथ के दर्शन का सिलसिला सुचारू रूप से शुरू हो जाता है। श्रद्धालु और देवलु अपने आराध्य देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेते हैं।
देव-संस्कृति और पारंपरिक अनुष्ठान: ढालपुर मैदान में अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे आउटर सिराज, निरमंड और घाटी के अन्य हिस्सों) से पहुंचे देवी-देवताओं के शिविरों में पारंपरिक वाद्ययंत्रों (ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों और थाली-शंख) की गूंज के साथ पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान शुरू होते हैं।
Kullu, Kullu | Oct 22, 2026