अपना घर आश्रम की सेवा से स्वस्थ हुए जगन्नाथ प्रभुजी, भावुक पिता की आँखों से छलके खुशी के आँसू
जंजीरों में जकड़ी जिंदगी को मिला सहारा, उपचार और सेवा से स्वस्थ होकर परिजनों के साथ घर लौटे प्रभुजी
सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं की एक भावुक कर देने वाली मिसाल अपना घर आश्रम, बेदला, उदयपुर में देखने को मिली। मानसिक अस्वस्थता के कारण कभी जंजीरों में बंधकर जीवन बिताने को मजबूर जगन्नाथ मीणा प्रभुजी स्वस्थ होकर अपने परिजनों के साथ घर लौटे। लंबे समय बाद अपने बेटे को स्वस्थ और सामान्य स्थिति में देखकर पिता हीरालाल मीणा भावुक हो उठे। उनकी आँखों से छलकते खुशी के आँसू आश्रम की सेवा और समर्पण की सार्थकता बयां कर रहे थे।
जंजीरों में बंधे आश्रम पहुँचे थे प्रभुजी
आश्रम अध्यक्ष गोपाल कनेरिया ने बताया कि 27 जुलाई 2026 को अमरपुरा फला, थाना कल्याणपुर, ऋषभदेव निवासी जगन्नाथ मीणा प्रभुजी को उनके परिजनों ने अपना घर आश्रम में भर्ती कराया था। उस समय उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। उनकी असामान्य गतिविधियों से परेशान होकर परिजनों ने उनके हाथ-पैर लोहे की जंजीरों से बाँध रखे थे। परिवार के लिए उनकी देखभाल करना चुनौतीपूर्ण हो गया था।
आश्रम में भर्ती होने के बाद प्रभुजी को चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया गया। साथ ही, आश्रम के सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने उनकी देखभाल और सेवा में कोई कमी नहीं रखी। उचित उपचार, आत्मीय व्यवहार और निरंतर सेवा के परिणामस्वरूप उनके स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। समय के साथ उनकी स्थिति बेहतर हुई और वे आश्रम के दैनिक कार्यों में भी हाथ बँटाने लगे।
प्रभुजी को स्वस्थ देखकर भावुक हुए पिता
जगन्नाथ प्रभुजी के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होने पर आश्रम की ओर से उनके परिजनों को इसकी जानकारी दी गई। सूचना मिलने पर आज उनके पिता हीरालाल मीणा, छगनलाल, सुरेशचंद्र, बाबूलाल सहित अन्य परिजन आश्रम पहुँचे।
इस अवसर पर छगनलाल ने बताया कि जब जगन्नाथ को आश्रम में भर्ती कराया गया था, तब उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वे अपने कपड़े उतारकर नग्न हो जाते थे और उनकी गतिविधियों से पूरा परिवार परेशान था। परिस्थितियों से विवश होकर उनके हाथ-पैर जंजीरों से बाँधने पड़े थे।
आज जब परिजनों ने जगन्नाथ प्रभुजी को स्वस्थ और पहले से बेहतर स्थिति में देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विशेष रूप से पिता हीरालाल मीणा अपने बेटे को इस अवस्था में देखकर भावुक हो गए और उनकी आँखों से आँसू बहने लगे। यह दृश्य उपस्थित सभी लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था।
तिलक और उपरना पहनाकर दी विदाई
आश्रम की आवश्यक औपचारिकताएँ पूर्ण करने के बाद आश्रम संरक्षक सुरेश विजयवर्गीय, अध्यक्ष गोपाल कनेरिया एवं सचिव अशोक कोठारी ने जगन्नाथ प्रभुजी का तिलक लगाकर एवं उपरना पहनाकर आत्मीय सम्मान के साथ विदाई दी। इसके बाद प्रभुजी अपने परिजनों के साथ सकुशल घर के लिए रवाना हुए।
अपना घर आश्रम में जगन्नाथ प्रभुजी के जीवन में आया यह सकारात्मक बदलाव इस बात का प्रमाण है कि उचित चिकित्सकीय उपचार, संवेदनशील देखभाल और आत्मीय सेवा से जरूरतमंद व्यक्तियों के जीवन में नई आशा जगाई जा सकती है।
यह विदाई केवल एक प्रभुजी की घर वापसी नहीं, बल्कि एक परिवार के जीवन में लौटी खुशियों, पिता के हृदय में जागे विश्वास और मानवीय सेवा की सार्थकता का भावपूर्ण प्रसंग बन गई।
news by :
गोपाल कनेरिया
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Girwa, Udaipur | Oct 12, 2026