कुछ अपवाद छोड़कर पंचायती राज व्यवस्था तथा नगर निकाय में कितने भी ईमानदार लोगों को चुनकर सरपंच और चैयरमेन बना दो । सभी सरकारी फंडों को दीमक की तरह चाटने लग जाते हैं।
इन संस्थाओं में एस्टीमेट और बिल पास करने वाले जितने भी साईनिंग अधिकारी होते हैं वे सभी निर्धारित कमीशन तो लेते ही हैं। उन बिलों में हिस्सेदारी भी होती है जो धरातल पर कहीं होते ही नहीं हैं । और लाखों रुपये सरकारी खजाने से फर्जी कार्यों के नाम पर निकाल लिए जाते हैं। अभी बढराम गांव का मामला सामने रख रहा हूं। आगे अन्य पंचायतों तथा नगर परिषद के क्रियाकलापों को सामने लाया जाएगा।
Palwal, Palwal | Sep 30, 2026