प्राथमिकता के साथ पंचायतों द्वारा क्षतिग्रस्त शांतिधाम शेडों का पुनर्निर्माण
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अंतिम संस्कार की गरिमा के लिए पंचायतों की संवेदनशील पहल
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सामाजिक जीवन में कुछ आवश्यकताएं ऐसी होती हैं, जिनका सीधा संबंध मानवीय गरिमा और संवेदनाओं से होता है। किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार एवं अंतिम श्रद्धांजलि के समय शांतिपूर्ण और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराना भी इन्हीं आवश्यकताओं में शामिल है। इसके लिए शांतिधाम स्थल तक सुगम पहुंच मार्ग तथा दाह संस्कार के लिए सुरक्षित एवं व्यवस्थित शेड का होना आवश्यक है।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विदिशा जिले की ग्राम पंचायतों द्वारा क्षतिग्रस्त शांतिधाम शेडों के पुनर्निर्माण कार्य को प्राथमिकता दी गई। ग्राम पंचायत झगरिया के ग्राम सलेतरा, ग्राम पंचायत ईसाखेड़ी के ग्राम शाहपुर तथा ग्राम पंचायत खजूरिया पठारी के ग्राम विसराहा में दाह संस्कार स्थल के शेड जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पाए गए थे। इससे ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के समय अनेक संभावित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता था। ग्रामीणों की आवश्यकता एवं समस्या को संज्ञान में लेते हुए शासन की मंशानुसार संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा इन तीनों स्थानों पर शांतिधाम शेडों के पुनर्निर्माण का कार्य प्राथमिकता से प्रारंभ कराया गया। पंचायतों की सक्रियता और तत्परता के परिणामस्वरूप लगभग दो सप्ताह की अल्प अवधि में ग्राम सलेतरा, शाहपुर एवं विसराहा के क्षतिग्रस्त शेडों का पुनर्निर्माण कार्य पूर्ण कराया गया।
जिला प्रशासन की इस त्वरित पहल से अब ग्रामीणों को दाह संस्कार के दौरान मौसम एवं अन्य परिस्थितियों से जुड़ी संभावित परेशानियों से राहत मिली है। साथ ही, अंतिम संस्कार के लिए बेहतर, सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध हुआ है। शांतिधाम शेडों का पुनर्निर्माण केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकता और मानवीय संवेदनाओं के प्रति पंचायतों की जिम्मेदारी का उदाहरण है। पंचायतों द्वारा समस्या को प्राथमिकता से चिन्हित कर कम समय में उसका निराकरण किया जाना सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। #vidisha