"स्कूल चलें हम" का नारा तो खूब दिया जाता है, लेकिन सवाल है—चलें कैसे?
मध्यप्रदेश के सतना जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र के छुलहा टोला में मासूम बच्चे पहली ही बारिश में कीचड़ से जूझते हुए स्कूल जाने को मजबूर हैं। जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए, वे अपने कपड़े और जूते बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
@drmohanyadav जी शिक्षा का अधिकार केवल किताबों में नहीं, बल्कि स्कूल तक सुरक्षित और सम्मानजनक पहुँच में भी होना चाहिए।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग है कि इस लगभग 900 मीटर के मार्ग का तत्काल निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों का भविष्य कीचड़ में न फँसे।
बच्चों को भाषण नहीं, बेहतर रास्ता चाहिए।
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