समरसता के कलश सिर पर, लेकिन संगठन की सूची में दलित समाज गायब! 😂
भाजपा एक तरफ ‘समरसता संकल्प अभियान’, ‘कलश वंदन यात्रा’ और ‘संत रविदास समरसता यात्रा’ निकालकर दलित समाज की हितैषी होने का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ नर्मदापुरम भाजपा की विशेष आमंत्रित सदस्यों, जिला कार्यकारिणी और अन्य महत्वपूर्ण सूचियों में रविदास समाज एवं अनुसूचित जाति वर्ग की मौजूदगी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सवाल सीधा है— समरसता सिर्फ मंच और यात्राओं तक है या संगठन में भागीदारी तक भी पहुंचेगी?
मेरे दलित समाज के भाइयों से एक सवाल—
कलश सिर पर रखवा लेने से सम्मान मिलेगा या संगठन में बराबरी की जगह देने से?
यात्रा निकलवा लेने से प्रतिनिधित्व मिलेगा या निर्णय लेने वाली जगह पर भागीदारी से?
खाकी वर्दी पहनकर कैंप में घूमना हो या समरसता की यात्रा में कदमताल करना—
अगर संगठन की सूची में ही समाज की आवाज नजर नहीं आएगी, तो फिर यह समरसता किसके लिए और किस बात की?
पहले सूची में ढूंढो मेरे भाइयों को…
फिर समरसता का ढोल बजाना!
वरना यही कहना पड़ेगा—
कलश में समरसता और सूची में… ‘मोगैंबो’ की तरह गायब! 😂
इति श्री… रेवा खंडे! 😂😂