कहते हैं, जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत शरीर नहीं, बल्कि हौसला और एक-दूसरे का साथ होता है।
जमुई के लोहरा गांव का यह दिव्यांग दंपति इसकी जीती-जागती मिसाल है। दृष्टिबाधित पति अवधेश मांझी और दोनों पैरों से दिव्यांग पत्नी गायत्री देवी ने हार मानने के बजाय संघर्ष को अपना रास्ता बनाया। जीविका योजना से मिली 15 हजार रुपये की सहायता से मनिहारी का छोटा व्यवसाय शुरू किया और सरकारी मोटर ट्राइसाइकिल के सहारे आज अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सपना है अपनी बेटी को पढ़ाकर बड़ा अधिकारी बनाना। लेकिन पिछले दो महीने से दिव्यांग पेंशन बंद होने के कारण परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है।
यदि सरकारी योजनाओं का लाभ लगातार मिलता रहे और समाज के लोग भी ऐसे परिवारों का साथ दें, तो न जाने कितने सपने सच हो सकते हैं।
इस प्रेरणादायक कहानी को अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि यह आवाज जिम्मेदार अधिकारियों और समाजसेवियों तक पहुंचे और इस परिवार की बेटी की पढ़ाई में मदद का रास्ता बन सके।
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Jamui, Jamui | Jul 10, 2026