🔴 मुरलीगंज में 1.65 करोड़ की कथित अवैध निकासी पर हंगामा, प्रमुख ने मांगी उच्चस्तरीय जाँच की माँग
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मुरलीगंज (मधेपुरा)। मुरलीगंज प्रखंड में 1 करोड़ 65 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी को लेकर पंचायत समिति सदस्यों और प्रखंड प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। प्रखंड प्रमुख अब्दुल जब्बार के नेतृत्व में आयोजित विशेष बैठक में 19 पंचायत समिति सदस्यों ने बीडीओ, लेखापाल एवं नाजीर की मिलीभगत से राशि निकासी का गंभीर आरोप लगाया और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
विशेष बैठक में उठे गंभीर सवाल
सोमवार को प्रखंड मुख्यालय स्थित पुराने सभा भवन में आयोजित बैठक के बाद प्रमुख अब्दुल जब्बार ने कहा कि उनकी अनुमति और जानकारी के बिना विभिन्न मदों से 1.65 करोड़ रुपये की निकासी की गई है। उन्होंने बताया कि जब इस संबंध में बीडीओ से जानकारी मांगी गई तो खर्च का पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध होने की बात कही गई थी। इसके बाद विशेष बैठक बुलाई गई, लेकिन बीडीओ, लेखापाल, अकाउंटेंट और नाजीर बैठक में शामिल नहीं हुए।
फर्जी बैंक स्टेटमेंट प्रस्तुत करने का आरोप
प्रमुख ने आरोप लगाया कि लेखापाल, अकाउंटेंट और नाजीर का कार्य देख रहे रंजन झा ने एक बैंक स्टेटमेंट प्रस्तुत किया, जो जांच में फर्जी पाया गया। उन्होंने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी और बैंक स्टेटमेंट में भारी विसंगतियां मिलीं। वहीं बैंक से प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित खातों में किसी मद की राशि शेष नहीं है।
'ऑपरेटर ही बना बैठा है पूरी राशि का मालिक'
प्रखंड उपप्रमुख यादव उमेश कुमार ने आरोप लगाया कि रंजन झा एक ऑपरेटर है, जिसका दो वर्ष पूर्व ही तबादला हो चुका है, फिर भी वह वित्तीय कार्यों में सक्रिय है। उन्होंने आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) से सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों की चल-अचल संपत्ति की जांच कराने की मांग की।
उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, "शीशे की अदालत में पत्थर की गवाही है, कातिल ही मुहाफिज है, कातिल ही गवाह है।"
डोंगल अपडेट के नाम पर ओटीपी लेकर निकासी का आरोप
प्रमुख ने आरोप लगाया कि डोंगल अपडेट कराने के नाम पर कई बार ओटीपी प्राप्त किया गया और इसी प्रक्रिया के दौरान अवैध रूप से राशि निकाली गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पंचायत समिति सदस्य धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे।
'कागज पर खुलीं योजनाएं, कागज पर ही खर्च हुई राशि'
नाढी पंचायत के समिति सदस्य अमरेन्द्र यादव ने आरोप लगाया कि पूरा प्रखंड बिचौलियों के कब्जे में है। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं का भौतिक सत्यापन, माप पुस्तिका (एमबी) और वित्तीय अभिलेखों की जांच आवश्यक है।
उनका आरोप है कि कई योजनाओं में सहायक अभियंता, कनीय अभियंता और कृषि पदाधिकारी को अभिकर्ता बनाया गया, जबकि उन्हें स्वयं यह जानकारी नहीं कि उनके नाम से कौन-कौन सी योजनाएं संचालित हुईं। उन्होंने कहा कि कई योजनाएं केवल कागजों पर ही चलाकर राशि की निकासी कर ली गई।
👉बीडीओ ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर प्रखंड विकास पदाधिकारी गोपाल कृष्णन ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि जिस बैठक का हवाला दिया जा रहा है, वह नियमों के अनुरूप नहीं बुलाई गई थी, क्योंकि बैठक बुलाने के लिए आवश्यक एक-तिहाई समिति सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर सारे सबूत उपलब्ध हैं। कभी भी एक साथ इतनी बड़ी राशि नहीं आती है।
बीडीओ का आरोप है कि प्रखंड प्रमुख सात-आठ योजनाओं का भुगतान बिना माप पुस्तिका (एमबी) के कराना चाहते थे। नियमानुसार भुगतान नहीं किए जाने के कारण उनके खिलाफ इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
📹 Sanjay Kumar मधेपुरा टाइम्स Madhepura Times