*यमुना ने छीन ली दो घरों की खुशियां*
*छुट्टियां बिताने आए दो इकलौते लाल नदी में समाए, एक का शव मिला, दूसरे की तलाश जारी।*
बिंदकी, फतेहपुर।
गर्मी की छुट्टियों की मस्ती कुछ ही पलों में मातम में बदल गई। जाफरगंज थाना क्षेत्र के बिंदौर घाट पर मंगलवार सुबह यमुना नदी में नहाने गए दो मासूम चचेरे-मौसेरे भाई तेज बहाव की भेंट चढ़ गए। हादसे में एक बालक का शव बरामद हो गया, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। इस दर्दनाक घटना ने दो परिवारों की खुशियां उजाड़ दीं, क्योंकि दोनों बच्चे अपने-अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे।
मंगलवार सुबह करीब 10 बजे जाफरगंज निवासी योगेश अपने 11 वर्षीय भतीजे ऋषभ मिश्रा और उसके 12 वर्षीय मौसेरे भाई प्रतीक पाण्डेय के साथ बिंदौर घाट पर यमुना स्नान के लिए पहुंचे थे। दोनों बच्चे नदी में नहा रहे थे कि अचानक गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गए। देखते ही देखते दोनों मासूम मदद के लिए हाथ-पांव मारते हुए नदी की लहरों में ओझल हो गए।बच्चों को डूबता देख योगेश की चीखें घाट पर गूंज उठीं। शोर सुनकर पास में पशु चरा रहे जयनारायण निषाद और देशराज निषाद जान जोखिम में डालकर नदी में कूद पड़े। काफी देर तक चले खोज अभियान के बाद ऋषभ को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मासूम की सांसें थम चुकी थीं। वहीं प्रतीक का कोई सुराग नहीं लग सका। स्थानीय गोताखोर और ग्रामीण लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए हैं।परिजनों के मुताबिक प्रतीक के पिता प्रमोद पाण्डेय गाजियाबाद में रहते हैं। गर्मी की छुट्टियां बिताने वह गांव आया था और अपनी मौसी के घर जाफरगंज घूमने गया था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि छुट्टियों की यह मुलाकात जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगी।हादसे के बाद जब यह खबर घर पहुंची तो दोनों परिवारों में चीख-पुकार मच गई। मांओं का कलेजा फट पड़ा, परिजनों की आंखों से आंसुओं का सैलाब थमने का नाम नहीं ले रहा था। गांव की गलियां मातम में डूब गईं। हर आंख नम थी और हर जुबान पर यही सवाल था कि आखिर इन मासूमों का क्या कसूर था।बिंदौर घाट पर देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। एक ओर ऋषभ का निर्जीव शरीर परिजनों के सामने था, तो दूसरी ओर यमुना की लहरों में लापता प्रतीक की तलाश जारी थी। नदी किनारे टकटकी लगाए खड़े परिजन हर पल एक चमत्कार की उम्मीद कर रहे थे।इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यमुना की लहरों ने कुछ ही मिनटों में दो घरों के चिराग बुझा दिए और पीछे छोड़ गईं सिर्फ आंसू, सिसकियां और कभी न भरने वाला दर्द।