#बिसाऊ_में_फिर_सजेगा_त्रेता_युग_का_रण!
बिना संवाद... फिर भी बोल उठेंगे किरदार
11 अक्टूबर से शुरू होगी विश्व प्रसिद्ध मूक रामलीला,
बिना संवाद हाव-भाव से जीवंत होगी रामायण की गाथा
बिसाऊ की धरती एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है। दिन के उजाले में मंचित होने वाली विश्व प्रसिद्ध मूक रामलीला का आगाज 11 अक्टूबर से होगा। गढ़ के पास स्थित रामलीला मैदान दंगल में इस बार राम और रावण की सेनाओं के बीच ऐसा युद्ध दृश्य देखने को मिलेगा, जिसमें 15 हजार तीरों की बारिश, विशाल अस्त्र-शस्त्र और पांच अलग-अलग पुतलों का दहन आकर्षण का केंद्र रहेगा।
रामलीला हवेली से लेकर दंगल मैदान तक तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। अध्यक्ष राजेन्द्र मिश्र के नेतृत्व में श्याम सुन्दर शर्मा, कैलाश पारीक, कमल बजावा वाला, गौरव माटोलिया, बाबू नोवाल, प्रीतम दाधीच और विकास पारीक सहित रामलीला प्रबंध समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता दिन-रात जुटे हुए हैं
बिना संवाद... फिर भी बोल उठेंगे किरदार
बिसाऊ की मूक रामलीला की सबसे बड़ी पहचान यही है कि यहां कलाकार संवाद नहीं बोलते। हाव-भाव, अभिनय और युद्ध कौशल के जरिए रामायण की पूरी कथा जीवंत होती है। यही अनूठी परंपरा इसे देश-दुनिया में अलग पहचान दिलाती है।
15 हजार तीर, 25 धनुष... युद्ध का होगा विराट नजारा
रामलीला समिति के अनुसार इस बार 15 हजार तीर, 21 गदा, 30 पूंछ, 50 जोड़ी डंडे, 25 धनुष, 20 लकड़ी की तलवारें, 5 भाले और 35 शक्ति बाण तैयार किए गए हैं। इसके अलावा 11 फीट लंबा शिव धनुष, संजीवनी बूटी वाला पहाड़, मुखौटे और विशेष वेशभूषाएं भी तैयार की जा रही हैं।
आखिरी 10 दिन दंगल बनेगा रणभूमि
राम जन्म सहित शुरुआती लीलाओं के बाद आखिरी दस दिनों में राम-रावण युद्ध का रोमांच चरम पर पहुंचेगा। प्रतिदिन करीब 800 से 1000 तीर चलाए जाएंगे। 25 धनुषों के साथ राम दल और राक्षस दल के करीब 30-30 कलाकार युद्ध दृश्यों में अपना हुनर दिखाएंगे।
पांच दिन... पांच पुतले... अधर्म का अंत
इस बार लंका दहन के साथ मेघनाथ, कुंभकरण, नरांतक और रावण के पुतलों का अलग-अलग दिनों में दहन होगा। खास बात यह है कि नरांतक का पुतला दहन बिसाऊ की मूक रामलीला की अनूठी परंपरा है।
पहली बार मूक कॉमेडी का प्रयोग
रामलीला में इस बार हास्य का नया रंग भी देखने को मिलेगा। कलाकार बिना किसी संवाद के केवल हाव-भाव और अभिनय के जरिए कॉमेडी प्रस्तुत करेंगे। समिति के अनुसार रामलीला के इतिहास में यह एक नया प्रयोग होगा।
राम, सीता और लक्ष्मण की भूमिका
इस बार मानव जलधारी राम, विशाल शर्मा सीता और मधुसूदन शर्मा लक्ष्मण की भूमिका निभाएंगे। कलाकारों की रिहर्सल लगातार जारी है।
भामाशाहों ने खोला सहयोग का खजाना
आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए बिसाऊ सहित देश-विदेश में बसे प्रवासी-अप्रवासी भामाशाह भी आगे आए हैं। संरक्षक महावीर प्रसाद सोती, कमल पोद्दार और जगदीश कसेरा के सानिध्य में नगरवासी तन-मन-धन से आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। इस बार की मूक रामलीला सिर्फ मंचन नहीं... बिसाऊ की संस्कृति, आस्था और सदियों पुरानी परंपरा का विराट प्रदर्शन होगी।
#bissau #jhunjhunuupdate #shekhawatiexpress #vedioviral #highlight #rajasthan #mukramlila #ramlila #ramayana