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Gwalior Gird, Gwalior | Jun 4, 2022

MORE NEWS

तेज रफ्तार का कहर: राजमाता चौराहे पर अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराई कार, चालक घायल; पुलिस जुटी हादसे की जांच में...

ग्वालियर के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित राजमाता चौराहे पर रविवार देर रात तेज रफ्तार एक कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक वाहन के अंदर ही फंस गया। हादसे की आवाज सुनते ही आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और घायल ड्राइवर को बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। दुर्घटना के चलते कुछ समय के लिए चौराहे पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहन हटवाकर सामान्य कराया। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और वाहन से नियंत्रण खोना हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। वहीं, पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि दुर्घटना की पूरी परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

तेज रफ्तार का कहर: राजमाता चौराहे पर अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराई कार, चालक घायल; पुलिस जुटी हादसे की जांच में... ग्वालियर के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित राजमाता चौराहे पर रविवार देर रात तेज रफ्तार एक कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक वाहन के अंदर ही फंस गया। हादसे की आवाज सुनते ही आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और घायल ड्राइवर को बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। दुर्घटना के चलते कुछ समय के लिए चौराहे पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहन हटवाकर सामान्य कराया। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और वाहन से नियंत्रण खोना हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। वहीं, पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि दुर्घटना की पूरी परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

Gwalior Gird, Gwalior | Jun 29, 2026

ग्वालियर रेलवे बना तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, अब इंजन मरम्मत के लिए नहीं जाना पड़ेगा झांसी...

 रेलवे ने तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ग्वालियर में ही रेल इंजनों के अहम विद्युत उपकरणों की मरम्मत और ओवरहॉलिंग की सुविधा शुरू कर दी है। अब 180 केवीए स्टैटिक इन्वर्टर और हिंद रेक्टीफायर सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की रिपेयरिंग के लिए इंजनों को झांसी भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। करीब 1.46 करोड़ रुपये की इस परियोजना से इंजनों का डाउनटाइम घटेगा, ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू होगा और समयपालन में सुधार आएगा। इस आधुनिक व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ झांसी-ग्वालियर रेलखंड को मिलेगा, जहां यात्री और मालगाड़ियों की उपलब्धता, गति तथा परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है।

ग्वालियर रेलवे बना तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, अब इंजन मरम्मत के लिए नहीं जाना पड़ेगा झांसी... रेलवे ने तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ग्वालियर में ही रेल इंजनों के अहम विद्युत उपकरणों की मरम्मत और ओवरहॉलिंग की सुविधा शुरू कर दी है। अब 180 केवीए स्टैटिक इन्वर्टर और हिंद रेक्टीफायर सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की रिपेयरिंग के लिए इंजनों को झांसी भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। करीब 1.46 करोड़ रुपये की इस परियोजना से इंजनों का डाउनटाइम घटेगा, ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू होगा और समयपालन में सुधार आएगा। इस आधुनिक व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ झांसी-ग्वालियर रेलखंड को मिलेगा, जहां यात्री और मालगाड़ियों की उपलब्धता, गति तथा परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है।

Gwalior Gird, Gwalior | Jun 29, 2026

ग्वालियर के जिनावली गांव में 7 साल पुरानी रंजिश ने एक बार फिर खून-खराबे का रूप ले लिया... #gwaliornews #gwaliorpolice #crimenews

ग्वालियर के जिनावली गांव में 7 साल पुरानी रंजिश ने एक बार फिर खून-खराबे का रूप ले लिया... #gwaliornews #gwaliorpolice #crimenews

Gwalior Gird, Gwalior | Jun 28, 2026

#sunday

#sunday

Gwalior Gird, Gwalior | Jun 28, 2026

तिघरा का जलस्तर घटा, ग्वालियर पर गहराया जल संकट, 1 जुलाई से एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई की तैयारी, लाखों लोग हो सकते हैं प्रभावित...

ग्वालियर में लगातार घटते जलस्तर ने पेयजल संकट की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले तिघरा जलाशय में अब केवल 38 प्रतिशत पेयजल ही शेष बचा है, जिसके चलते नगर निगम के पीएचई विभाग ने 1 जुलाई से शहर में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है। हालांकि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) की मंजूरी मिलना बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि मौजूदा व्यवस्था जारी रही तो जुलाई के अंत तक जलाशय का जलस्तर बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच सकता है। वहीं वैकल्पिक व्यवस्था लागू होने पर उपलब्ध पानी को अगस्त की शुरुआत तक सुरक्षित रखा जा सकेगा, बशर्ते इस बीच अच्छी बारिश हो जाए। मानसून की धीमी रफ्तार ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि जून समाप्त होने के बावजूद जलाशय में पर्याप्त जलभराव नहीं हो सका है। शहर के शिंदे की छावनी, घोसीपुरा, सिंधिया नगर, हनुमान घाटी, किलागेट, रेशम मिल, चंदनपुरा, आदित्यपुरम, गिरवाई, मोतीझील, किशनबाग सहित कई इलाकों में पहले से ही पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। कई स्थानों पर नलों में पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे लोग टैंकरों के भरोसे हैं। रहवासियों का कहना है कि गंदे पानी और अधूरी सप्लाई से वे पहले ही परेशान हैं, ऐसे में यदि एक दिन छोड़कर पानी मिला तो दैनिक जीवन और अधिक प्रभावित होगा। अब पूरे शहर की निगाहें एमआईसी के फैसले और मानसून की सक्रियता पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले कुछ दिन ग्वालियर की जल व्यवस्था के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

तिघरा का जलस्तर घटा, ग्वालियर पर गहराया जल संकट, 1 जुलाई से एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई की तैयारी, लाखों लोग हो सकते हैं प्रभावित... ग्वालियर में लगातार घटते जलस्तर ने पेयजल संकट की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले तिघरा जलाशय में अब केवल 38 प्रतिशत पेयजल ही शेष बचा है, जिसके चलते नगर निगम के पीएचई विभाग ने 1 जुलाई से शहर में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है। हालांकि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) की मंजूरी मिलना बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि मौजूदा व्यवस्था जारी रही तो जुलाई के अंत तक जलाशय का जलस्तर बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच सकता है। वहीं वैकल्पिक व्यवस्था लागू होने पर उपलब्ध पानी को अगस्त की शुरुआत तक सुरक्षित रखा जा सकेगा, बशर्ते इस बीच अच्छी बारिश हो जाए। मानसून की धीमी रफ्तार ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि जून समाप्त होने के बावजूद जलाशय में पर्याप्त जलभराव नहीं हो सका है। शहर के शिंदे की छावनी, घोसीपुरा, सिंधिया नगर, हनुमान घाटी, किलागेट, रेशम मिल, चंदनपुरा, आदित्यपुरम, गिरवाई, मोतीझील, किशनबाग सहित कई इलाकों में पहले से ही पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। कई स्थानों पर नलों में पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे लोग टैंकरों के भरोसे हैं। रहवासियों का कहना है कि गंदे पानी और अधूरी सप्लाई से वे पहले ही परेशान हैं, ऐसे में यदि एक दिन छोड़कर पानी मिला तो दैनिक जीवन और अधिक प्रभावित होगा। अब पूरे शहर की निगाहें एमआईसी के फैसले और मानसून की सक्रियता पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले कुछ दिन ग्वालियर की जल व्यवस्था के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

Gwalior Gird, Gwalior | Jun 28, 2026