जीरो टॉलरेंस नीति के साथ अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए— मुख्य सचिव
मुख्यमंत्री के निर्देशों की प्रभावी पालना, प्रोएक्टिव पुलिसिंग, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई पर जोर
धौलपुर, 15 जुलाई। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, अपराध नियंत्रण को प्रभावी तथा आमजन को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सतत प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है।
मुख्य सचिव बुधवार को शासन सचिवालय में आयोजित गृह विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश की कानून व्यवस्था को प्रभावी बनाने के क्रम में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा द्वारा गत बैठक में दिए गए निर्देशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को प्रत्येक माह नियमित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित करने तथा आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि जटिल मामलों का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित हो सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि अपराधियों के साथ किसी भी स्तर पर मिलीभगत अथवा अनुचित संरक्षण की शिकायत नहीं आनी चाहिए। ऐसे मामलों में ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अपराध की गंभीरता के अनुरूप अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा संगठित अपराध के हॉटस्पॉट चिन्हित कर वहां विशेष अभियान चलाए जाएं। साथ ही थाना स्तर पर सीएलजी की नियमित बैठकें आयोजित की जाएं, जिनमें यथासंभव उच्चाधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित हो।
उन्होंने प्रदेश में अवैध खनन की रोकथाम के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिलेवार होने वाले अपराधों में होने वाली वृद्धि एवं कमी की रिपोर्ट 15 दिनों में प्रस्तुत की जाए।
मुख्य सचिव ने पुलिस महानिरीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को नियमित रूप से फील्ड विजिट के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की फील्ड में सक्रिय उपस्थिति से कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
बैठक में पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि पुलिसिंग रिएक्टिव के स्थान पर प्रोएक्टिव होनी चाहिए, ताकि अपराधों की रोकथाम समय रहते सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में अपराध की प्रवृत्ति बढ़ रही है, वहां पुलिस अधीक्षक स्वयं नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों पर अनावश्यक दबाव बनाने वाले स्थानीय माफिया तत्वों को पनपने से रोका जाए तथा संबंधित इकाइयों की नियमित जांच एवं निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों में मात्रात्मक एवं गुणात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा इनके स्रोतों की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम के लिए महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, प्रत्येक जिले में प्रति सप्ताह महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने निर्देश भी दिए। साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए नियमित जन-जागरूकता अभियान चलाने, प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने तथा प्रभावी कार्रवाई तंत्र विकसित करने पर विशेष बल देते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने एवं सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों की सतत निगरानी कर उनके विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अपराधियों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमणों की पहचान कर नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने तथा जिलेवार नाकाबंदी व्यवस्था की प्रभावशीलता की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में जातीय तनाव की संभावना रहती है, वहां पुलिस अधीक्षक विशेष सतर्कता बरतें। भाईचारा बिगाड़ने का प्रयास करने वाले असामाजिक तत्वों की सूची तैयार की जाए तथा सामाजिक समरसता बनाए रखने वाले प्रबुद्ध एवं सम्मानित नागरिकों की भी सूची तैयार कर उनके साथ नियमित संवाद बनाए रखा जाए।
बैठक में जिला कलक्टर श्रीनिधि बी टी, जिला पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान, अतिरिक्त जिला कलक्टर हरिराम मीना, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।