लोकतंत्र को सशक्त बनाने में मीडिया और मतदाता शिक्षा की भूमिका पर वैश्विक मंथन
लोकतंत्र को सशक्त बनाने में मीडिया की भूमिका अहम : नवीन महाजन
देश के हर स्कूल में होंगे इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब : आशीष गोयल
7 देशों के निर्वाचन प्रतिनिधियों, मीडिया विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने साझा किए अनुभव
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राजस्थान की पहल पर जयपुर में आयोजित हुई अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस
धौलपुर, 15 जुलाई। लोकतंत्र को अधिक सशक्त, सहभागी और जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राजस्थान द्वारा भारत निर्वाचन आयोग के इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM), नई दिल्ली तथा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर के सहयोग से बुधवार को "इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इलेक्शंस, मीडिया एंड वोटर एजुकेशन : स्ट्रेंथनिंग डेमोक्रेसी थ्रू इन्फॉर्म्ड पार्टिसिपेशन" का सफल आयोजन किया गया।
इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भारत सहित जॉर्जिया, क्रोएशिया, उज्बेकिस्तान, नेपाल, फिलीपींस और गुयाना के निर्वाचन प्रबंधन निकायों के प्रतिनिधियों, मीडिया विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, निर्वाचन अधिकारियों एवं शोधकर्ताओं ने सहभागिता करते हुए लोकतंत्र में मीडिया की बदलती भूमिका, मतदाता शिक्षा, डिजिटल संचार, फेक न्यूज से मुकाबला और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनविश्वास को सुदृढ़ करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया।
भारत निर्वाचन आयोग के महानिदेशक (मीडिया) श्री आशीष गोयल ने मुख्य वक्तव्य में कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए जागरूक मतदाता और जिम्मेदार मीडिया दोनों समान रूप से आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग अब इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ELC) को देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान के रूप में विस्तार देगा। इसके तहत देश के प्रत्येक विद्यालय में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर देशभर से उत्कृष्ट कार्य करने वाले 1,000 विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवीन महाजन ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जागरूक और सक्रिय मतदाताओं में निहित है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में मीडिया केवल सूचना प्रसारित करने का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने, नागरिकों में निर्वाचन प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ाने तथा भ्रामक सूचनाओं के प्रभाव को कम करने का एक प्रभावी मंच बन चुका है। उन्होंने पारदर्शी, विश्वसनीय और सहभागी निर्वाचन व्यवस्था के लिए मीडिया और निर्वाचन संस्थाओं के बीच सतत समन्वय एवं संवाद को और मजबूत करने पर बल दिया।
पहला पैनल : मतदाता शिक्षा में मीडिया की बदलती भूमिका पर चर्चा
सम्मेलन के प्रथम पैनल डिस्कशन का विषय "Beyond Broadcasting: The Evolving Role of Media in Voter Education" रहा। इस सत्र में दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संपादक श्री एल. पी. पंत, फर्स्ट इंडिया ग्रुप के सीईओ एवं मैनेजिंग एडिटर श्री पवन अरोड़ा तथा टाइम्स ऑफ इंडिया के ब्यूरो प्रमुख श्री भानु प्रताप सिंह ने अपने विचार साझा किए। सत्र का संचालन डॉ. प्रशांत भादू ने किया।
वक्ताओं ने कहा कि आज मीडिया केवल सूचना प्रसारित करने का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने, मतदाताओं को जागरूक बनाने और तथ्यपरक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रभावी मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में मीडिया की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है तथा तथ्य आधारित और निष्पक्ष चुनावी रिपोर्टिंग लोकतंत्र की विश्वसनीयता को मजबूत करती है।
दूसरा पैनल : मीडिया प्रमाणन एवं निगरानी की भूमिका पर मंथन
दूसरे पैनल डिस्कशन का विषय "Media Certification and Monitoring: Promoting Transparency, Equity and Public Trust" रहा। इस सत्र में श्रीमती टीना डाबी ( जिला निर्वाचन अधिकारी, टोंक), डॉ. मनीष जैन (पीआरओ, नागौर) तथा डॉ. आस्था सक्सेना, एसोसिएट प्रोफेसर, पूर्णिमा विश्वविद्यालय ने सहभागिता की। सत्र का संचालन मीडिया नोडल ऑफिसर डॉ. रेणु पूनिया ने किया।
पैनलिस्टों ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान मीडिया प्रमाणन एवं निगरानी तंत्र चुनावी पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनविश्वास बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने पेड न्यूज़, दुष्प्रचार, फेक न्यूज़ तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित सामग्री की निगरानी की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और प्रभावी नियामकीय व्यवस्था के माध्यम से निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
दुष्प्रचार से निपटने और समावेशी मतदाता शिक्षा पर दिया जोर
पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव के बीच मतदाताओं को सही एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विशेष रूप से युवाओं, प्रथम बार मतदान करने वाले मतदाताओं, महिलाओं, दिव्यांगजनों तथा दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों तक प्रभावी मतदाता शिक्षा पहुंचाने के लिए मीडिया, निर्वाचन प्राधिकरणों, शिक्षण संस्थानों और नागरिक समाज के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
सम्मेलन में देश-विदेश के निर्वाचन प्रबंधन संस्थानों, मीडिया विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने लोकतंत्र को और अधिक सहभागी, पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाने के लिए अपने अनुभव साझा किए।
कॉनफ्रेंस के तकनीकी सत्रों में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने मीडिया एवं निर्वाचन संचार, समावेशी मतदाता शिक्षा, डिजिटल मीडिया के प्रभाव, फेक न्यूज से निपटने की रणनीतियों तथा निर्वाचन प्रक्रिया में जनविश्वास बढ़ाने के अपने-अपने देशों के अनुभव साझा किए। वहीं भारत के विभिन्न राज्यों और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों ने नवाचार आधारित पहलों एवं श्रेष्ठ प्रथाओं का प्रस्तुतीकरण किया।
विचार-विमर्श के दौरान इस बात पर व्यापक सहमति व्यक्त की गई कि प्रभावी मतदाता शिक्षा, जिम्मेदार मीडिया, डिजिटल साक्षरता और संस्थागत समन्वय ही सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला हैं। सम्मेलन में प्राप्त सुझावों एवं श्रेष्ठ प्रथाओं का संकलन भविष्य में निर्वाचन जागरूकता कार्यक्रमों तथा मतदाता शिक्षा अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज के रूप में तैयार किया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. रौनक बैरागी के स्वागत उद्बोधन से हुआ। मीडिया नोडल अधिकारी डॉ. पूनिया ने सम्मेलन की विषय-वस्तु का परिचय देते हुए मीडिया आधारित मतदाता शिक्षा की आवश्यकता और प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. पूनिया ने सभी प्रतिभागियों, विशेषज्ञों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मेलन का समापन लोकतांत्रिक सहभागिता को और अधिक सशक्त एवं समावेशी बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।