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🚨 प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल — पत्रकारों के साथ कथित कार्रवाई पर उठी आवाज
3 सितंबर को दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से सवाल पूछने की कोशिश के दौरान महिला पत्रकार शाहीन ख़ान और नफ़ीसा ख़ान को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर साकेत थाने ले जाने, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं।
वहीं, पूर्व BBC News हिन्दी पत्रकार हुदा जरीवाला को सहारनपुर मस्जिद विध्वंस से जुड़े सवाल उठाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की कार्यशैली की आलोचना करने के बाद यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की खबर भी चिंता पैदा करती है।
महिला पत्रकारों ने कथित मारपीट के संबंध में FIR दर्ज करने के लिए शिकायत दी है। यदि शिकायत पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है, तो यह पुलिस की जवाबदेही और निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हमारी मांग है कि हुदा जरीवाला के मामले की निष्पक्ष कानूनी समीक्षा की जाए और यदि उनकी गिरफ्तारी में कानून का उल्लंघन हुआ है तो उन्हें तत्काल राहत दी जाए। साथ ही, शाहीन ख़ान और नफ़ीसा ख़ान की शिकायत पर निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
⚠️ यदि अगले 72 घंटे में शाहीन ख़ान और नफ़ीसा ख़ान की शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो मैं स्वयं साकेत पुलिस थाने के बाहर शांतिपूर्ण धरना देने पहुंचूंगा।
📢 मेरे सभी पत्रकार भाइयों और बहनों से अपील है—अपनी साथी पत्रकारों के साथ खड़े हों।
आज सवाल किसी एक पत्रकार का है, कल सवाल हममें से किसी का भी हो सकता है।
सत्ता से सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है।
प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है।
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Hardoi, Hardoi | Sep 9, 2026