#ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने और चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए भारतीय रेलवे की एक बेहद महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक परियोजना है। इस ₹37,000 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 125 किलोमीटर है, जिसका लगभग 83% हिस्सा (100 किमी से अधिक) सुरंगों (Tunnels) से होकर गुजरेगा,
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) की देखरेख में इस प्रोजेक्ट का काम बेहद तीव्र गति से चल रहा है:
• कुल प्रगति: परियोजना का लगभग 75% से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।
• सुरंग और पुल निर्माण: इस रूट पर अधिकांश मुख्य सुरंगों (Tunnels) और पुलों का काम पूरा कर लिया गया है। देवप्रयाग और जनसू के बीच इस प्रोजेक्ट की सबसे लंबी सुरंग (14.58 किलोमीटर) का निर्माण भी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है।
• स्टेशन और ट्रैक लिंकिंग: श्रीनगर (रानीहाट) और मलेथा जैसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर यार्ड निर्माण, लेवलिंग और प्लेटफॉर्म का काम तेजी से चल रहा है। टनल के भीतर गिट्टी रहित ट्रैक (Ballastless Track) बिछाने की तैयारी और आधुनिक डिजिटल केबलिंग (हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क) का काम भी शुरू हो गया है।
• समय सीमा (Deadlines):
• 2028 तक: ऋषिकेश से ब्यासी (Byasi) तक पहला ब्लॉक सेक्शन ट्रेन संचालन के लिए तैयार करने का लक्ष्य है, जिसका पहला ट्रायल रन जून 2028 में प्रस्तावित है।
• दिसंबर 2029 तक: इस पूरी रेल लाइन (ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक) को पूरी तरह चालू करने का अंतिम लक्ष्य रखा गया है।