🔳शिक्षा की अलख जगाने खेतों तक पहुंचे गुरुजी
🔳16 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर धान रोप रहे विद्यार्थियों से मिले शिक्षक, अभिभावकों को समझाया—“आज खेत नहीं, स्कूल ज्यादा जरूरी”
🔳कटनी - शिक्षा केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती, बल्कि एक सच्चा शिक्षक वहां तक पहुंचता है, जहां उसका विद्यार्थी होता है। रीठी विकासखंड के आदिवासी अंचल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैंगवा के शिक्षकों ने इसी सोच को साकार करते हुए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसने शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को नई पहचान दी है।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बाद विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति अपेक्षा से कम थी। यह केवल आंकड़ों का विषय नहीं था, बल्कि शिक्षकों की चिंता का कारण भी बन गया। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के नामांकन बढ़ाने संबंधी निर्देशों के पालन में शिक्षकों ने बच्चों का इंतजार करने के बजाय स्वयं उनकी तलाश शुरू की। जब वे गांव पहुंचे तो अधिकांश घर सूने मिले। जानकारी मिली कि परिवार के सदस्य खेतों में धान रोपाई के लिए गए हैं और बच्चे भी उनके साथ काम में लगे हुए हैं।
इस जानकारी के बाद विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य श्री विपिन तिवारी एवं अतिथि शिक्षकों ने बिना समय गंवाए लगभग 16 किलोमीटर का कठिन सफर तय किया। कच्चे रास्तों और खेतों के बीच पहुंचकर उन्होंने उन विद्यार्थियों से मुलाकात की, जिनके हाथों में इस समय किताबों की जगह धान के पौधे थे।
शिक्षकों ने बच्चों और उनके अभिभावकों से आत्मीय संवाद करते हुए समझाया कि खेती भले ही परिवार की आजीविका का आधार है, लेकिन शिक्षा बच्चों के पूरे जीवन की दिशा तय करती है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे नियमित रूप से विद्यालय जाएंगे, तो वे भविष्य में अपने परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदलने में सक्षम बनेंगे।
शिक्षकों की इस संवेदनशील पहल और समर्पण से प्रभावित अभिभावकों ने आश्वासन दिया कि वे अब बच्चों को खेतों में साथ नहीं ले जाएंगे और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजेंगे।
यह पहल जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग के उस संकल्प को भी मजबूती देती है, जिसके तहत “हर बच्चा स्कूल में, हर बच्चे तक शिक्षा” के लक्ष्य के साथ जिलेभर में घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। शिक्षक केवल नामांकन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि प्रत्येक बच्चा नियमित रूप से विद्यालय पहुंचे और उसकी पढ़ाई बाधित न हो।
रीठी के नैंगवा विद्यालय की यह पहल स्पष्ट करती है कि जब शिक्षक अपने दायित्व को नौकरी नहीं, बल्कि मिशन मान लेते हैं, तब शिक्षा बच्चों का इंतजार नहीं करती, बल्कि स्वयं खेतों, पगडंडियों और दूरस्थ बस्तियों तक पहुंच जाती है। यही समर्पण शिक्षा को जन-आंदोलन का रूप देता है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को संवारता है।
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11 views | Katni, Madhya Pradesh | Jul 23, 2026