जल, जंगल और जमीन बचानी है तो पाँचवीं अनुसूची लागू करो!"
उत्तराखंड एकता मंच ने साफ कहा है कि पलायन, बेरोजगारी, भूमि संकट, संसाधनों की लूट और सांस्कृतिक पहचान पर बढ़ते खतरे का स्थायी समाधान पाँचवीं अनुसूची और ट्राइब स्टेटस में है।
खटीमा से उत्तरकाशी तक चली "एकजुट-एकमुट यात्रा" के दौरान लोगों ने एक स्वर में स्थानीय अधिकारों, संसाधनों की सुरक्षा और मूल निवासियों के हितों की रक्षा की मांग उठाई।
"उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन पर पहला हक उत्तराखंडवासियों का होना चाहिए।"
अब 22 नवंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड में होगी निर्णायक हुंकार, जहां प्रदेश के राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर बुलाया जाएगा।
उत्तराखंड की अस्मिता, अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई अब गांव-गांव तक पहुंचेगी।
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