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जालौन: #trending #jalaun #viral #importantnews

Jalaun, Jalaun | Jun 9, 2021

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Jalaun, Jalaun | Jun 26, 2026

साइबर थाना उरई की पहल, तहसील परिसर में ग्रामीणों को किया जागरूक 

 एसआई आयुष गुप्ता ने बताया—एक गलती और खाली हो सकता है बैंक खाता 

ओटीपी, लिंक, क्यूआर कोड और फर्जी कॉल से सतर्क रहने की दी सलाह 

 दर्जनों ग्रामीणों को साइबर अपराधियों के नए-नए हथकंडों की दी जानकारी 

 किसी भी अनजान कॉल, मैसेज और लालच भरे ऑफर से बचने की अपील

उरई (जालौन) साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और आम जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से साइबर थाना उरई की टीम ने गल्ला मंडी स्थित तहसील परिसर में विशेष जागरूकता अभियान चलाया। 
अभियान के दौरान एसआई आयुष गुप्ता ने ग्रामीणों से संवाद कर साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई और बताया कि थोड़ी सी लापरवाही लोगों की मेहनत की कमाई को खतरे में डाल सकती है।

उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, बैंक डिटेल, एटीएम नंबर या पासवर्ड न बताएं। 
फर्जी लिंक, क्यूआर कोड स्कैन और सोशल मीडिया पर आने वाले लालच भरे संदेशों से भी सावधान रहें।
 किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाना से संपर्क करने की सलाह दी गई।

इस दौरान एसआई सेवेंद्र सिंह परमार, हेड कांस्टेबल आलोक मिश्रा एवं आलोक निरंजन भी मौजूद रहे और लोगों को साइबर सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी। UP Police Ddmps Jalaun 

 आप भी सुनिए साइबर एसआई आयुष गुप्ता ने ग्रामीणों को क्या समझाया... 

 आपकी क्या राय है? क्या ऐसे जागरूकता अभियान गांव-गांव चलने चाहिए? 
कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

साइबर थाना उरई की पहल, तहसील परिसर में ग्रामीणों को किया जागरूक एसआई आयुष गुप्ता ने बताया—एक गलती और खाली हो सकता है बैंक खाता ओटीपी, लिंक, क्यूआर कोड और फर्जी कॉल से सतर्क रहने की दी सलाह दर्जनों ग्रामीणों को साइबर अपराधियों के नए-नए हथकंडों की दी जानकारी किसी भी अनजान कॉल, मैसेज और लालच भरे ऑफर से बचने की अपील उरई (जालौन) साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और आम जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से साइबर थाना उरई की टीम ने गल्ला मंडी स्थित तहसील परिसर में विशेष जागरूकता अभियान चलाया। अभियान के दौरान एसआई आयुष गुप्ता ने ग्रामीणों से संवाद कर साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई और बताया कि थोड़ी सी लापरवाही लोगों की मेहनत की कमाई को खतरे में डाल सकती है। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, बैंक डिटेल, एटीएम नंबर या पासवर्ड न बताएं। फर्जी लिंक, क्यूआर कोड स्कैन और सोशल मीडिया पर आने वाले लालच भरे संदेशों से भी सावधान रहें। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाना से संपर्क करने की सलाह दी गई। इस दौरान एसआई सेवेंद्र सिंह परमार, हेड कांस्टेबल आलोक मिश्रा एवं आलोक निरंजन भी मौजूद रहे और लोगों को साइबर सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी। UP Police Ddmps Jalaun आप भी सुनिए साइबर एसआई आयुष गुप्ता ने ग्रामीणों को क्या समझाया... आपकी क्या राय है? क्या ऐसे जागरूकता अभियान गांव-गांव चलने चाहिए? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

Jalaun, Jalaun | Jun 26, 2026

उरगांव गौशाला विवाद: सच दबाने की कोशिश या साजिश का खेल? वायरल वीडियो के बाद उठे बड़े सवाल

वीडियो बनाने वालों पर कार्रवाई की मांग, लेकिन ग्रामीण पूछ रहे—गौशाला की बदहाल व्यवस्था की जांच कब होगी?

उरगांव गौशाला को लेकर छिड़ा विवाद अब केवल एक शिकायत या वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में चर्चा और बहस का विषय बन गया है। एक तरफ ग्राम प्रधान ने कुछ लोगों पर गौशाला की छवि धूमिल करने, अव्यवस्था फैलाने और सुनियोजित साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कोतवाली में नामजद शिकायत दर्ज कराई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों का कहना है कि असली सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने गौशाला की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। वीडियो में गौशाला परिसर के अंदर ऐसे दृश्य दिखाई दिए, जिन्हें लेकर लोगों ने गोवंशों की सुरक्षा, देखभाल और व्यवस्थाओं पर चिंता जताई। वीडियो सामने आते ही क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी।

लेकिन मामला तब नया मोड़ ले गया जब ग्राम प्रधान की ओर से पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर मृत गोवंश को गौशाला परिसर में डालकर वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर पंचायत एवं गौशाला प्रबंधन को बदनाम करने की कोशिश की। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

इधर, ग्रामीणों का एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि यदि गौशाला की व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त थीं तो वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले हालात की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही। लोगों का कहना है कि जांच केवल वीडियो बनाने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि गौशाला में गोवंशों को पर्याप्त चारा, पानी, चिकित्सा और सुरक्षा मिल रही थी या नहीं।

ग्रामीणों का मानना है कि गौशाला किसी राजनीतिक या व्यक्तिगत विवाद का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। ऐसे में यदि कहीं लापरवाही या अव्यवस्था है तो उसे उजागर करना अपराध नहीं माना जाना चाहिए। वहीं यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर झूठी तस्वीर पेश कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

पूरा मामला अब दो अहम सवालों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। पहला—क्या वास्तव में गौशाला को बदनाम करने की साजिश रची गई? और दूसरा—क्या वायरल वीडियो में दिखाई गई स्थिति वास्तविक थी या नहीं?

क्षेत्र के लोगों की नजर अब पुलिस और प्रशासन की जांच पर टिकी हुई है। जनता चाहती है कि जांच निष्पक्ष हो, दोषी चाहे कोई भी हो, कार्रवाई हो। क्योंकि सवाल केवल यह नहीं है कि वीडियो किसने बनाया, बल्कि उससे भी बड़ा सवाल यह है कि वीडियो में जो दिखाई दिया, उसकी सच्चाई क्या थी?

अब देखना यह होगा कि जांच का दायरा केवल शिकायत तक सीमित रहता है या फिर गौशाला की व्यवस्थाओं और वायरल वीडियो दोनों पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाती है।

उरगांव गौशाला विवाद: सच दबाने की कोशिश या साजिश का खेल? वायरल वीडियो के बाद उठे बड़े सवाल वीडियो बनाने वालों पर कार्रवाई की मांग, लेकिन ग्रामीण पूछ रहे—गौशाला की बदहाल व्यवस्था की जांच कब होगी? उरगांव गौशाला को लेकर छिड़ा विवाद अब केवल एक शिकायत या वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में चर्चा और बहस का विषय बन गया है। एक तरफ ग्राम प्रधान ने कुछ लोगों पर गौशाला की छवि धूमिल करने, अव्यवस्था फैलाने और सुनियोजित साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कोतवाली में नामजद शिकायत दर्ज कराई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों का कहना है कि असली सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने गौशाला की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। वीडियो में गौशाला परिसर के अंदर ऐसे दृश्य दिखाई दिए, जिन्हें लेकर लोगों ने गोवंशों की सुरक्षा, देखभाल और व्यवस्थाओं पर चिंता जताई। वीडियो सामने आते ही क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी। लेकिन मामला तब नया मोड़ ले गया जब ग्राम प्रधान की ओर से पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर मृत गोवंश को गौशाला परिसर में डालकर वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर पंचायत एवं गौशाला प्रबंधन को बदनाम करने की कोशिश की। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इधर, ग्रामीणों का एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि यदि गौशाला की व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त थीं तो वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले हालात की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही। लोगों का कहना है कि जांच केवल वीडियो बनाने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि गौशाला में गोवंशों को पर्याप्त चारा, पानी, चिकित्सा और सुरक्षा मिल रही थी या नहीं। ग्रामीणों का मानना है कि गौशाला किसी राजनीतिक या व्यक्तिगत विवाद का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। ऐसे में यदि कहीं लापरवाही या अव्यवस्था है तो उसे उजागर करना अपराध नहीं माना जाना चाहिए। वहीं यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर झूठी तस्वीर पेश कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। पूरा मामला अब दो अहम सवालों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। पहला—क्या वास्तव में गौशाला को बदनाम करने की साजिश रची गई? और दूसरा—क्या वायरल वीडियो में दिखाई गई स्थिति वास्तविक थी या नहीं? क्षेत्र के लोगों की नजर अब पुलिस और प्रशासन की जांच पर टिकी हुई है। जनता चाहती है कि जांच निष्पक्ष हो, दोषी चाहे कोई भी हो, कार्रवाई हो। क्योंकि सवाल केवल यह नहीं है कि वीडियो किसने बनाया, बल्कि उससे भी बड़ा सवाल यह है कि वीडियो में जो दिखाई दिया, उसकी सच्चाई क्या थी? अब देखना यह होगा कि जांच का दायरा केवल शिकायत तक सीमित रहता है या फिर गौशाला की व्यवस्थाओं और वायरल वीडियो दोनों पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाती है।

Jalaun, Jalaun | Jun 26, 2026