मंटू मुर्मू पर हमले के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग सख्त, गिरिडीह एसपी से 7 दिनों में मांगी रिपोर्ट
गिरिडीह। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी से जुड़े प्रदेश सह मंत्री मंटू मुर्मू पर कथित प्राणघातक हमला, जातिगत अपमान और उत्पीड़न के मामले में अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग यानी एनसीएसटी ने सख्त रुख अपनाया है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
दरअसल, मंटू मुर्मू, पिता शुकरा मुर्मू, निवासी जोधपुर, थाना ताराटांड़, गिरिडीह ने 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को शिकायत भेजी थी। शिकायत में उन्होंने अपने साथ हुए कथित हमले, जातिगत अपमान और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338क के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मामले की जांच/अन्वेषण करने का निर्णय लिया है।
आयोग ने गिरिडीह एसपी से मामले में लगाए गए आरोपों और अब तक पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से संबंधित पूरी जानकारी सात दिनों के अंदर आयोग को उपलब्ध कराने को कहा है।
जवाब नहीं मिला तो जारी हो सकता है समन
सबसे अहम बात यह है कि आयोग ने अपने नोटिस में सख्त चेतावनी भी दी है। निर्धारित समय सीमा के भीतर अगर आयोग को जवाब या कार्रवाई की रिपोर्ट नहीं मिलती है, तो आयोग संविधान के अनुच्छेद 338क के तहत प्राप्त सिविल न्यायालय की शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है।
इसके तहत संबंधित अधिकारी को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने के लिए समन जारी किया जा सकता है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के इस कदम के बाद अब मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। गिरिडीह पुलिस पूरे प्रकरण में आयोग को क्या रिपोर्ट सौंपती है और आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
यानी मंटू मुर्मू प्रकरण में अब सिर्फ आरोप और शिकायत तक मामला सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के संवैधानिक आयोग की निगरानी भी शुरू हो गई है।