महज 15 मिनट की देरी और बुझ गए हजारों सपने, #दिल्ली अग्निकांड में #बोकारो की बेटी की मौत
#Bokaro: दिल्ली में 3 जून को हुए भीषण होटल अग्निकांड ने बोकारो के जैनामोड़ की 25 वर्षीय होनहार युवती श्रुतिका बरनवाल के सपनों को हमेशा के लिए बुझा दिया। आग की लपटों और जहरीले धुएं के बीच मोबाइल पर गूंजती उनकी आखिरी चीख “बचाओ, बचाओ” आज भी परिजनों और दोस्तों के कानों में गूंज रही है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है।
##फोन पर मदद की गुहार, फिर अचानक कट गया संपर्क
परिवार के करीबी आशीष कुमार भारती ने बताया कि हादसे के समय श्रुतिका अपने एक दोस्त से मोबाइल पर बात कर रही थीं। अचानक होटल में अफरा-तफरी मच गई और बातचीत के दौरान ही वह मदद के लिए चीखने लगीं। कुछ ही क्षण बाद फोन कट गया। दोस्त ने तुरंत यह जानकारी उनके भाई शुभम बरनवाल को दी। इसके बाद शुभम ने कई बार बहन को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
##पिता ने रिश्तेदारों को भेजा, लेकिन मिली दुखद खबर
बढ़ती बेचैनी के बीच पिता रमेश प्रसाद बरनवाल, जो जैनामोड़ में विकास फ्लोर मिल का संचालन करते हैं, ने दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदारों को होटल भेजा। इसी दौरान वह खुद रांची एयरपोर्ट से दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे थे। तभी रिश्तेदारों का फोन आया कि श्रुतिका का शव मिल गया है और उसे मैक्स अस्पताल ले जाया गया है। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
##पार्थिव शरीर पहुंचते ही गम में डूबा पूरा जैनामोड़
गुरुवार को जब श्रुतिका का पार्थिव शरीर जैनामोड़ स्थित आवास पहुंचा तो पूरा इलाका गमगीन हो उठा। बड़ी संख्या में पड़ोसी, रिश्तेदार और शुभचिंतक अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। घर का माहौल चीख-पुकार और सिसकियों से भर गया।
##मां बोलीं क्या पता था, वही आखिरी बातचीत होगी
श्रुतिका की मां कि हादसे वाले दिन सुबह करीब सात बजे उनकी बेटी से आखिरी बार बात हुई थी। वह बेहद खुश थी और अपने काम को लेकर उत्साहित भी। मां ने कहा, “उसने बताया था कि उसका काम अच्छे से पूरा हो गया है। मुझे क्या पता था कि यह हमारी आखिरी बातचीत होगी।”
##महज 15 मिनट की देरी ने छीन ली जिंदगी
बताया जाता है कि हादसे से महज 15 मिनट पहले श्रुतिका को होटल से कार्यालय के लिए निकलना था। उन्होंने कैब बुक की थी, लेकिन ट्रैफिक के कारण वह समय पर नहीं पहुंच सकी। मजबूरन उन्हें दूसरी गाड़ी का इंतजार करना पड़ा। परिजनों का मानना है कि अगर कैब समय पर आ जाती तो शायद वह इस हादसे का शिकार नहीं होतीं।
##जहरीले धुएं ने ली जान, पहचानना भी हुआ मुश्किल
रिश्तेदारों के अनुसार, जहरीले धुएं के कारण उनका चेहरा और शरीर बुरी तरह प्रभावित हो गया था, जिससे पहचान करना भी मुश्किल हो रहा था। परिवार को आशंका है कि दम घुटने से उनकी मौत हुई।
##पढ़ाई में अव्वल, सपनों से भरा था भविष्य
श्रुतिका पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं। उन्होंने वाईबीएन यूनिवर्सिटी, रांची से जूलॉजी में स्नातक की पढ़ाई की और बाद में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) से वाटर पॉलिसी एंड गवर्नेंस में मास्टर्स किया। मई में ही उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की थी और जीवन की नई शुरुआत को लेकर उत्साहित थीं।
##परिवार ने शुरू कर दी थी शादी और भविष्य की चर्चा
दो भाई-बहनों में सबसे छोटी श्रुतिका अपने माता-पिता की आंखों का तारा थीं। परिवार ने हाल ही में उनके विवाह और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा शुरू की थी। वह सपनों और उम्मीदों से भरी हुई थी। एक दिन पहले ही उसके पिता से उससे बात हुई थी। नहीं सोचा था कि उसकी बातें इतनी जल्दी यादों में बदल जाएंगी।”
##पिता का सपना पूरा करना चाहती थीं श्रुतिका
उनके मित्र ऋषि चतुर्वेदी ने बताया कि श्रुतिका नौकरी मिलने से बेहद खुश थीं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहती थीं। वह अपने पिता के बेहद करीब थीं और हमेशा उनका नाम रोशन करने का सपना देखती थीं।
##नई नौकरी की खुशी के बीच आ गया मौत का संदेश
संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में उन्हें रबर केमिकल एंड पॉलिमर स्किल डेवलपमेंट काउंसिल में बिजनेस डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव के पद पर नियुक्ति मिली थी। गुरुवार शाम संस्थान में आयोजित शोकसभा में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उन्हें एक मेधावी, उत्साही और मिलनसार छात्रा के रूप में याद किया।
##अधूरे रह गए सपने, छोड़ गईं अनगिनत यादें
श्रुतिका की असमय मौत ने न सिर्फ एक परिवार से उसकी खुशियां छीन लीं, बल्कि उन तमाम सपनों को भी अधूरा छोड़ दिया, जिन्हें पूरा करने के लिए वह पूरे उत्साह के साथ जीवन की नई उड़ान भरने जा रही थीं। उनकी आखिरी पुकार और मुस्कुराता चेहरा अब सिर्फ यादों में ही रह गया है।
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Chas, Bokaro | Jun 5, 2026