लाखों खर्च के बाद भी सांवरिया जी में कवि सम्मेलन रहा फ्लॉप! खराब साउंड बना वजह, बीच में कुर्सियां छोड़कर गए श्रोता, मंदिर मंडल की पोल खुली।
दैनिक वीरधरा राजस्थान।
चित्तौड़गढ़। मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवरिया जी मंडफिया में जलझूलनी एकादशी मेले के तहत 21 सितंबर रात को आयोजित अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ। लाखों रुपये खर्च कर बुलाए गए नामचीन कवियों के बावजूद खराब साउंड सिस्टम और बदइंतजामी के कारण दर्शक कार्यक्रम बीच में छोड़कर चले गए और कुर्सियां खाली पड़ी रहीं।
करोड़ों की आस्था, हजारों की व्यवस्था:
मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव और CEO दिनेश धाकड़ के नेतृत्व में मेले का आयोजन हुआ था। मंडफिया बाईपास स्थित उप जिला चिकित्सालय के पास बने मंच पर शैलेश लोढ़ा (तारक मेहता फेम), संजय झाला, भुवन मोहिनी, दीपक पारीक, शंभू शिखर समेत 13 कवियों को बुलाया गया था।
साउंड ने बिगाड़ा खेल:
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंच का साउंड सिस्टम इतना खराब था कि पीछे बैठे श्रोताओं तक आवाज ही नहीं पहुंच रही थी। माइक में लगातार सीटी की आवाज, इको और बेस की गड़बड़ी से कवियों को बार-बार टोकना पड़ा।
जिसके कार्यक्रम शुरू होने के एक घंटे बाद ही लोग उठ-उठ कर जाने लगे। रात 11 बजे तक पंडाल की 40% से ज्यादा कुर्सियां खाली हो चुकी थीं।
रिकॉर्डिंग पर हंगामा:
मंच से खुद शैलेश लोढ़ा को कहना पड़ा - "क्यों रिकॉर्ड करके उनको सुनाना चाहते हो जिनको यहां आकर सुनने की तहजीब नहीं है... जब तक रिकॉर्डिंग चलेगी मैं एक शब्द नहीं बोलूंगा" जिसके बाद कैमरे बंद करवाए गए। इससे आयोजकों की सोशल मीडिया टीम में अफरा-तफरी मच गई।
सवालों के घेरे में मंदिर मंडल:
हर साल मेले के नाम पर लाखों का टेंडर होता है - साउंड, टेंट, लाइट, कलाकारों की फीस। लेकिन इस बार की अव्यवस्था ने साफ कर दिया कि पैसा कागजों पर खर्च हुआ, जमीन पर नहीं। न पीने के पानी की व्यवस्था, न बैठने की प्रॉपर लाइन, न साउंड चेक।
श्रद्धालुओं का कहना है कि सांवरिया सेठ के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ता है, लेकिन मंदिर मंडल की लापरवाही से भक्तों का ही अपमान हो रहा है।