छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के अरकार गांव में आयोजित 'सुशासन तिहार' जनसमस्या निवारण शिविर से एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक तरफ कलेक्टर सहित तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारी बैठकर जनता की शिकायतें सुन रहे थे, वहीं दूसरी तरफ मासूम बच्चे पानी के भारी-भारी केन उठाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाते दिखे। सुशासन के दावे वाले इस सरकारी कार्यक्रम में सरेआम नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराई गई, जो व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर मामले पर पूरा प्रशासनिक अमला पूरी तरह अनभिज्ञ (बेखबर) बना रहा। अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहे इस बाल श्रम ने शिविर की संवेदनशीलता और दावों की पोल खोलकर रख दी है। जनता की समस्याओं का हल करने पहुंचे जिम्मेदार अधिकारी जब अपने ही कार्यक्रम में मासूमों का शोषण नहीं रोक पा रहे हैं, तो आम लोगों को न्याय कैसे मिलेगा?
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