🔳स्लीमनाबाद टनल खुदाई कार्य पूर्ण, 5 जिलों का 1.85 लाख हेक्टेयर भू-क्षेत्र होगा सिंचित
🔳कटनी - मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कृषक कल्याण वर्ष में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश के अनुक्रम में कटनी जिले के स्लीमनाबाद टनल की खुदाई का कार्य पूर्ण हो गया है और टनल बोरिंग मशीन अब टनल के अंतिम स्थल पर पहुंच गई है। टनल की कुल लम्बाई 11.952 किलोमीटर है। यह देश की सबसे लंबी वाटर टनल है जो पुण्य सलिला मां नर्मदा की अमृतधारा को बिना पंप की सहायता प्राकृतिक बहाव के साथ सोन बेसिन से जोड़ने का सेतु के रूप में कार्य करेगी।
बरगी व्यपवर्तन परियोजना की दाई तट मुख्य नहर के किलोमीटर 104 से 116.865 किलोमीटर के मध्य निर्मित इस टनल का कार्य करीब डेढ़ दशक से चल रहा था। टनल की कुल लम्बाई 116.865 किलोमीटर से 129 किलोमीटर तक ओपन कैनाल रहेगी। इस कैनाल की जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक है जबकि टनल का डायमीटर 10.140 मीटर है। इस स्लीमनाबाद टनल के पूर्ण होने के बाद 1.85 लाख हेक्टयर भू क्षेत्र में सिचाई प्रस्तावित है।
*किसान होंगे समृद्ध*
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री श्री सहज श्रीवास्तव ने बताया कि अंचल के किसानों की समृद्धि और विकास की दिशा में स्लीमनाबाद टनल का निर्माण एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इस टनल के बनने से क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। इस टनल से कटनी शहर की पेयजल की आपूर्ति के लिए भी मां नर्मदा का पानी मिलेगा। इसके साथ ही जिले के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसका फायदा मिलेगा।
*ये जिले होंगे लाभान्वित*
परियोजना से कटनी जिले का 21 हजार 823 हेक्टेयर, मैहर का 54 हजार 227 हेक्टेयर, सतना का 1 लाख 4 हजार 970 हेक्टेयर, पन्ना का 448 हेक्टेयर और रीवा का 3 हजार 84 हेक्टेयर क्षेत्र सीधे लाभान्वित होंगे। इन सबको मिलाकर इसके साथ ही इन जिलों के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा।
बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बाँध से निकलने वाली स्लीमनाबाद की यह दाई तट मुख्य नहर (ट्रांस वेल्ली कैनाल ) प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक पानी डिस्चार्ज केयरिंग कैपेसिटी वाली नहर होंगी। इस टनल के वर्तमान में कुल लागत 1600 करोड़ रूपये से अधिक की हो गयी है। स्लीमनाबाद टनल के निर्माण की एजेंसी मेसर्स पटेल-एस.ई.डब्लूयू (संयुक्त उपक्रम) हैदराबाद है।
स्लीमनाबाद टनल अपनी पूर्णता के बाद पुण्य सलिला माँ नर्मदा की अमृत धारा सोन नदी से जुड़ जायेगी और यह प्रदेश के आधा दर्जन जिलों की भूमि की सिचाई और पेय जल का निमित्त बनेगी।
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Katni, Madhya Pradesh | Jul 15, 2026