अपनों से दूर बुजुर्गों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, एसपी कुमार गौतम ने निभाया बेटे का फर्ज।
नवरात्र के पावन अवसर पर बेतिया से मानवता और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल सामने आई, जिसने हर किसी का दिल छू लिया।
जिन बुजुर्गों को इस उम्र में अपनों के सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वे परिवार से दूर वृद्धाश्रम में जीवन बिताने को मजबूर हैं। ऐसे ही बेसहारा बुजुर्गों के लिए बेतिया एसपी कुमार गौतम किसी बेटे से कम नहीं बनकर सामने आए।
*एसपी खुद पहुंचे वृद्धाश्रम, गाड़ी में बैठाकर कराया दर्शन*
बेतिया एसपी कुमार गौतम खुद शहर के वृद्धाश्रम पहुंचे। वहां रह रहे बुजुर्ग महिला-पुरुषों को सम्मान के साथ अपने साथ गाड़ी में बैठाया और शहर के प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन कराए।
एसपी ने दुर्गा बाग मंदिर, पावर हाउस चौक, बंगाली कॉलोनी, बानूछापर सहित शहर के कई बड़े पंडालों में बुजुर्गों को दर्शन कराया। इस दौरान एसपी खुद बुजुर्गों का हाथ थामे, उन्हें सहारा देते हुए पंडालों तक ले जाते नजर आए।
*पुलिसकर्मियों ने भी दिया साथ, खाने-पीने का रखा ख्याल*
इस विशेष पहल के दौरान बुजुर्गों की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया। जिला पुलिस के जवान और विभिन्न थानों के पुलिसकर्मी भी बुजुर्गों के साथ मौजूद रहे। पुलिसकर्मियों ने बुजुर्गों का हाथ पकड़कर उन्हें भीड़ से निकालकर पंडाल तक पहुंचाया। रास्ते में उनके खाने-पीने की भी व्यवस्था की गई, ताकि बुजुर्ग आराम से दर्शन कर सकें।
*बुजुर्गों ने कहा - आज अपनों की कमी महसूस नहीं हुई*
वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने बताया कि अब तक दुर्गा पूजा के दौरान वे कभी पंडालों में जाकर दर्शन नहीं कर पाए थे। उनके लिए यह पहला अवसर था जब जिले के एसपी खुद उनके बीच आए और बेटे की तरह उन्हें मां के दरबार तक ले गए।
भावुक हुए बुजुर्गों ने कहा कि आज उन्हें अपने परिवार की कमी महसूस नहीं हो रही है। एसपी ने जिस स्नेह से उनका हाथ थामा, वह किसी बेटे से कम नहीं। सभी बुजुर्गों ने दिल से एसपी कुमार गौतम को लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की दुआएं दीं।
बेतिया एसपी की इस पहल ने साबित कर दिया कि खाकी वर्दी सिर्फ कानून-व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर समाज के बेसहारा और बुजुर्गों का सबसे बड़ा सहारा भी बन सकती है।