हां जी
रसायन विज्ञान भारत की खोज है
आयुर्वेद में ढाई हजार रसायनों का जिक्र है
भारत के ऋषियों ने आयुर्वेद के पहले वृक्षायुर्वेद के रसायन दिए
रस में अयन (आवेशित एटम) का होना रसायन है
आवेशित एटम के 5स्वरूप बताए
रूप
रंग
गंध
स्वर
स्पर्श
आज का विज्ञान तो केवल एटम आधारित रसायन बनाए है वो भी केमिकल फार्म में
सिंथेटिक रसायन दिए
या
सल्फाइड रसायन दिए
ये दोनों प्रभावी तो है पर नुकसानदायक होते है
जिंक सल्फेट
कॉपर सल्फेट
फेरस सल्फेट
कैल्सियम सल्फेट
मैग्नीशियम सल्फेट
ये सब सल्फाइड फार्म के रसायन निगेटिव होते है
इनको गर्म तवे पर रखेंगे तो बदबू निकलेगी।
बदबू निगेटिव ऊर्जा है,निगेटिव इकोलॉजी बनाती है
हमारे पूर्वजों द्वारा बताए गए रसायन
सब आयोनाइज्ड होते है
इतना ही नहीं इन्हें रंग में,गंध में स्वर में कैसे दिये जा सकते है बताए
इनको बनाने के लिए आयुर्वेद के
आसव प्रक्रिया
आरिष्ट प्रक्रिया
भस्म रसायन प्रक्रिया दिए
इन रसायनों को गौमूत्र से शोधन मारण करके निकालने की प्रक्रिया बताए
खेती में समस्याएं आती है और आयुर्वेद की इन प्रक्रियाओं से रसायन बनते चले गए और 150 फार्मूले विकसित हो गए।
पंच महाभूत की तृण मात्राएं (रूप रंग गंध स्वर स्पर्श) ही वे पंच तत्व है,जिनसे यह पूरी प्रकृति बनी है।
इन्हें प्राप्त करने की प्राकृतिक प्रक्रिया
यम नियम आहार विहार प्रत्याहार है।
कृत्रिम प्रक्रिया से इन्हें प्राप्त करने के लिए TCBT में
रूप चिकित्सा
रंग चिकित्सा
गंध चिकित्सा
स्वर चिकित्सा
स्पर्श चिकित्सा विकसित किए गए है,
अभी मैं इन्हें फसल उत्पादन के लिए पौधों पर उपयोग कर रहा हूं,कालांतर में ये मानव स्वास्थ्य पर भी उतने ही प्रभावी होंगे।
MCCAI पुणे में ये सब विषय रखने का मौका मिला
इसका संक्षिप्त वीडियो उपलब्ध है
Jabalpur, Jabalpur | Oct 8, 2026