औरंगाबाद में चाणक्य परिषद ने भरत तिवारी को दी श्रद्धांजलि.."गोली किसके आदेश पर चली, जांच हो" - जवनिया घटना पर उठाए सवाल।
रामानुज पाण्डेय की अध्यक्षता, अश्वनी तिवारी ने किया संचालन, हम पार्टी के सुनील चौबे समेत कई मौजूद।
*औरंगाबाद | 21 जून 2026*
औरंगाबाद में चाणक्य परिषद के तत्वाधान में आज पृथ्वीराज चौहान ट्रस्ट भवन में सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की स्मृति में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चाणक्य परिषद अध्यक्ष रामानुज पाण्डेय ने की और संचालन कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी तिवारी ने किया।
*1. पुष्पांजलि और 2 मिनट का मौन*
सभी उपस्थित लोगों ने भरत भूषण तिवारी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनकी आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखा।
*2. वक्ताओं ने क्या कहा - 5 मुख्य बिंदु*
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कई बातें रखीं:
*1. हिंसा-लॉ एंड ऑर्डर पर स्टैंड*: चाणक्य परिषद ने साफ कहा - "हम किसी भी प्रकार की हिंसा और कानून हाथ में लेने का समर्थन नहीं करते। देश में कानून का राज है, सबको कानून का सम्मान करना चाहिए।"
*2. जवनिया घटना पर सवाल*: वक्ताओं ने कहा कि जवनिया, भोजपुर की घटना परिवार और बिहार दोनों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। हथियार फेंकने के बाद गिरफ्तारी होनी चाहिए थी, कानून सम्मत कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन गोली मारी गई, यह गलत है। गोली किसके आदेश पर चलाई गई, इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
*3. भरत तिवारी के कदम पर टिप्पणी*: वक्ताओं ने माना कि भरत भूषण तिवारी द्वारा हथियार उठाना और अपशब्दों का प्रयोग करना पूरी तरह गलत था। इसका हम समर्थन नहीं करते।
*4. "बागी क्यों बना?" - जांच की मांग*: सवाल उठाया गया कि अगर भारत भूषण तिवारी हिस्ट्रीशीटर-अपराधी नहीं था, तो सामाजिक कार्यकर्ता से बागी-क्रांतिकारी बनने पर विवश क्यों हुआ? इसकी सूक्ष्म जांच राज्य-देश-समाज के हित में जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
*5. विस्थापितों के मुद्दे और अफसरशाही पर प्रहार*: कहा गया कि जिन विस्थापितों की मांग लेकर भरत तिवारी प्रशासन के पास जाता था, उन मांगों को पूरा न करके उल्टा उसके साथ दुर्व्यवहार-प्रताड़ना की गई। वक्ताओं ने कहा कि सरकारी अफसर भूल गए हैं कि वे "नौकरशाह" नहीं, लोकसेवक हैं। जनता के टैक्स से वेतन लेते हैं। भ्रष्टाचार, अहंकार, संवेदनहीनता से वे समाज को कलंकित कर रहे हैं।
*3. सरकार से 4 बड़ी मांगें*
चाणक्य परिषद ने सरकार से मांग की:
1. *जांच + सजा*: घटना की त्वरित पारदर्शी जांच कर दोषियों को कठोरतम सजा दी जाए ताकि यह नजीर बने।
2. *शहीद का दर्जा + प्रतिमा*: भरत भूषण तिवारी को भ्रष्टाचार-प्रशासनिक व्यवस्था के विरुद्ध क्रांतिकारी मानते हुए शहीद का दर्जा और प्रतिमा लगाई जाए।
3. *परिवार को सहायता*: परिवार को उचित मुआवजा, एक नौकरी और सुरक्षा दी जाए, उन्हें परेशान न किया जाए।
4. *विस्थापितों का समाधान + भ्रष्टाचार पर वार*: विस्थापितों की समस्या का तत्काल समाधान हो और सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार-संवेदनहीनता दूर करने के लिए भोजपुर से कार्रवाई शुरू हो।
*4. युवाओं से अपील*
चाणक्य परिषद ने देश के युवाओं से अपील की कि वे भ्रष्टाचार-कर्तव्यहीनता से दूर रहें। सरकारी पद पर जाएं तो याद रखें - आप पर परिवार के साथ-साथ देशवासियों का ऋण भी है। "स्वाधीन भारत में फिर कोई दूसरा भरत भूषण तिवारी न बने, न बलिदान हो" - यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
*5. कौन-कौन रहे मौजूद*
कार्यक्रम में हम पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सुनील चौबे, चाणक्य परिषद महामंत्री पूर्व मुखिया संजीव दुबे, पृथ्वीराज चौहान ट्रस्ट सचिव स्वर्णजीत सिंह, आचार्य विष्णुचित, अधिवक्ता योगेश मिश्रा, उदय पहलवान, रंजीत पाण्डेय, पुरुषोत्तम चौबे, राम विकास जी, विकास काली, भास्कर तिवारी, दिलीप त्रिवेदी, हरी पाठक, शिवपूजन पाण्डेय, मनु मिश्रा, रौशन मिश्रा सहित जिले के प्रमुख कार्यकर्ता शामिल हुए।
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