मलेरिया पीड़ित मासूम को गोद में लेकर घंटों डोंगी का इंतजार करती रही मां, उफनती नदी ने बढ़ाई मुश्किलें, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
उत्तर बस्तर कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड से एक बेहद मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और आवागमन की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। खैरीपदर गांव में एक मां अपने मलेरिया पीड़ित मासूम बेटे को गोद में लेकर घंटों नदी किनारे डोंगी (नाव) का इंतजार करती रही, ताकि इलाज कराने के बाद किसी तरह घर लौट सके।
जानकारी के अनुसार, बच्चे को तेज बुखार होने पर परिजन उसे उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। जांच में बच्चे में मलेरिया की पुष्टि हुई। इलाज के बाद जब मां अपने बेटे को लेकर घर लौटने लगी तो उफान पर बह रही नदी उसके सामने सबसे बड़ी बाधा बन गई। पुल नहीं होने के कारण उसे नदी पार करने के लिए डोंगी का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान वह बीमार बच्चे को गोद में लेकर नदी किनारे घंटों बैठी रही।
बारिश के कारण नदी का जलस्तर लगातार बढ़ा हुआ है। ऐसे में खैरीपदर सहित आसपास के ग्रामीणों को रोजमर्रा के काम, इलाज, स्कूल और बाजार जाने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। कई बार डोंगी का लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है।
इस घटना ने एक बार फिर दूरस्थ आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में हर साल यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खैरीपदर क्षेत्र में सुरक्षित आवागमन के लिए पुल का निर्माण कराया जाए और बारिश के मौसम में मरीजों के लिए विशेष परिवहन एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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Kanker, Kanker | Aug 4, 2026