700 वर्षों की ऐतिहासिक परंपरा को मिला नया स्वरूप, काछोला के दीपावली मेले में उमड़ रहा जनसैलाब
नवनिर्वाचित सरपंच गीता देवी माली की पहल पर दुकानदारों और मनोरंजन संचालकों को निशुल्क सुविधाएं,
सहकारी समिति में शुभ मुहूर्त पर विधि-विधान से हुआ मां लक्ष्मी का पूजन
काछोला :असलम रंगरेज
भीलवाड़ा जिले के काछोला कस्बे का करीब 700 वर्षों पुराना ऐतिहासिक दीपावली रास मेला इन दिनों श्रद्धा, परंपरा और उल्लास के रंग में रंगा नजर आ रहा है। सदियों से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा को आज भी क्षेत्रवासी पूरे उत्साह और आस्था के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। बाग के बालाजी चौक एवं मेला मैदान में आयोजित पांच दिवसीय मेले में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। झूले-चकरी, सर्कस और विभिन्न प्रकार की दुकानें मेले की रौनक बढ़ा रही हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की विश्राम स्थली से जुड़ी है पौराणिक मान्यता
काछोला के दीपावली रास मेले की पहचान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण अपने प्रवास के दौरान काछोला में रुके थे और यहां विश्राम किया था। इसी पौराणिक मान्यता के चलते कस्बे का धार्मिक महत्व भी विशेष माना जाता है। करीब सात सदियों से चली आ रही मेले की परंपरा ने काछोला को क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई है।
सरपंच गीता देवी माली की पहल से मेले को मिला नया स्वरूप
इस वर्ष मेले की व्यवस्थाओं में विशेष पहल देखने को मिल रही है। नवनिर्वाचित सरपंच गीता देवी माली एवं ग्राम पंचायत प्रशासन की पहल पर मेले को नया स्वरूप देने के प्रयास किए गए हैं। खास बात यह है कि मेले में मनोरंजन के साधन संचालित करने वालों और दुकानदारों को निशुल्क स्थान, ठहरने, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। इससे बाहर से आने वाले व्यापारियों और मनोरंजन संचालकों को राहत मिली है। सरपंच गीता देवी माली की इस पहल की कस्बे में सराहना हो रही है
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अरविंद माली पंचायत टीम के साथ संभाल रहे व्यवस्थाएं
मेले में आने वाले ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसके लिए सरपंच प्रतिनिधि अरविंद माली पंचायत प्रशासन की टीम के साथ लगातार व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। पेयजल, साफ-सफाई, रोशनी और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पंचायत टीम मेले में आने वाले लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जुटी हुई है।
सहकारी समिति में शुभ मुहूर्त पर विधि-विधान से हुआ मां लक्ष्मी का पूजन
दीपावली पर्व के पावन अवसर पर काछोला स्थित सहकारी समिति में भी धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। शुभ मुहूर्त में विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ मां लक्ष्मी का पूजन किया गया। इस दौरान दीप प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना की गई तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उन्नति की कामना की गई। सहकारी समिति परिसर में दीपोत्सव की रौनक रही और उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को दीपावली पर्व की शुभकामनाएं दीं।
84 गांवों की आस्था का प्रमुख केंद्र है
काछोला का मेला
काछोला का ऐतिहासिक दीपावली रास मेला आसपास के 84 गांवों के चौखले के ग्रामीणों की आस्था और सामाजिक मेलजोल का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मेले में अलग-अलग गांवों के लोग परिवार सहित पहुंचते हैं। यहां खरीदारी, मनोरंजन और आपसी मुलाकातों के साथ सामाजिक रिश्तों को भी नई मजबूती मिलती है।
दीपावली से दो दिन पहले पीहर लौटती हैं बहन-बेटियां
इस मेले की एक अनूठी सामाजिक परंपरा यह भी है कि दीपावली से करीब दो दिन पहले काछोला की विवाहित बहन-बेटियां अपने पीहर लौटती हैं। मायके में परिवारजनों के साथ समय बिताने और ऐतिहासिक मेले की रौनक देखने का यह अवसर उनके लिए विशेष महत्व रखता है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा मेले को पारिवारिक अपनत्व और रिश्तों की मिठास से जोड़ती है।
झूले-चकरी और सर्कस बने आकर्षण का केंद्र
पांच दिवसीय मेले में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के लोगों के लिए आकर्षण मौजूद है। मेला मैदान में झूले, चकरी, सर्कस, खिलौनों, खानपान और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानें सजी हुई हैं। शाम होते ही रोशनी से जगमगाता मेला मैदान लोगों की चहल-पहल से गुलजार हो उठता है।
परंपरा, आस्था और विकास का संगम बना
काछोला का दीपावली पर्व
काछोला का ऐतिहासिक दीपावली रास मेला आज भी अपनी पुरानी पहचान और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। एक ओर ग्राम पंचायत की ओर से मेले में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सहकारी समिति में मां लक्ष्मी पूजन के साथ दीपावली की धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया। आस्था, संस्कृति, व्यापार, मनोरंजन और सामाजिक भाईचारे का यह अनूठा संगम काछोला की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
Bhilwara, Bhilwara | Nov 8, 2026