राज्य पुरस्कार प्राप्त डॉ. रामविलास भारती की शवयात्रा में उमड़ा जनसैलाब, माछिल जमीन माछिल से दोहरीघाट तक हजारों कदमों ने दी अंतिम विदाई
मऊ। मंगलवार को मऊ ने अपने एक ऐसे शिक्षक को नम आंखों से विदाई दी जिसने अपनी नौकरी को सिर्फ जिम्मेदारी नहीं बल्कि सेवा का संकल्प माना था। जूनियर हाईस्कूल धरौली के प्रधानाध्यापक, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष और राज्य पुरस्कार से सम्मानित डॉ. रामविलास भारती की अंतिम यात्रा जब उनके पैतृक गांव माछिल जमीन माछिल से निकली तो लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। घर से लेकर सड़क तक सिर्फ लोग ही लोग दिखाई दे रहे थे। पत्नी और परिजनों के करुण क्रंदन ने माहौल को और भी भावुक कर दिया।
दिल्ली में प्रशिक्षण के दौरान हृदय गति रुकने से डॉ. रामविलास भारती का असमय निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर मंगलवार को जब माछिल जमीन माछिल स्थित पैतृक आवास पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए पहले से ही बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। जैसे-जैसे खबर फैलती गई भीड़ बढ़ती चली गई। शिक्षक, विद्यार्थी, ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग अपने प्रिय शिक्षक को अंतिम विदाई देने पहुंचते रहे।
*माछिल जमीन माछिल से दोहरीघाट तक साथ चलता रहा कारवां*
पैतृक निवास से अंतिम यात्रा शुरू हुई तो माछिल जमीन माछिल से लेकर रघौली, मझवारा मोड़, घोसी, धरौली, थानीदास और गोठा होते हुए दोहरीघाट मुक्तिधाम तक लोगों का कारवां चलता रहा। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
अंतिम यात्रा में कई जगह भावुक दृश्य देखने को मिले। लोग नम आंखों से अपने प्रिय शिक्षक को विदाई देते रहे। भीड़ के बीच बार-बार गूंजता रहा—“जब तक सूरज-चांद रहेगा, रामविलास भारती का नाम रहेगा।” यह नारा केवल श्रद्धांजलि नहीं बल्कि उनके प्रति लोगों के सम्मान और अपनत्व का एहसास करा रहा था।
डॉ. रामविलास भारती अब नहीं हैं लेकिन धरौली के विद्यालय की लाइब्रेरी, उनके पढ़ाए बच्चे, उनके किए सामाजिक कार्य और शिक्षा के लिए समर्पित जीवन उनकी कहानी कहते रहेंगे। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह बना कि कुछ लोग पद से नहीं अपने कर्मों से लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं।