विद्यार्थी शिक्षा के साथ समाज में समानता और बदलाव के वाहक बनें : विक्रमादित्य सिंह
जलवायु परिवर्तन हिमाचल के लिए गंभीर चुनौती, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी
शिमला। लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने के साथ समाज में समानता, भाईचारे और सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा देने के लिए भी आगे आना चाहिए। विद्यालय में विकसित होने वाला भाईचारा और आपसी संबंध जीवनभर अनमोल रहते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों से आग्रह किया कि समाज से असमानता को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं, ताकि समाज, प्रदेश और देश को आगे बढ़ाया जा सके। वह शिमला स्थित कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी (सीजेएम), चेल्सी के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने लगभग सार्वभौमिक साक्षरता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। यह उपलब्धि समर्पित शिक्षकों, जागरूक अभिभावकों और ज्ञान की शक्ति को समझने वाले विद्यार्थियों के प्रयासों का परिणाम है। हालांकि, साक्षरता केवल शुरुआत है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विद्यार्थी अपनी शिक्षा का उपयोग समाज, प्रदेश और देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए किस प्रकार करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है।
उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित विद्यालय में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को अभी से यह सोचना चाहिए कि वे भविष्य में अपने-अपने क्षेत्रों में किस तरह के बदलाव लाना चाहते हैं। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद समाज में व्याप्त समस्याओं का समाधान करने और विकास की नई संभावनाएं तलाशने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का समाज और अपने क्षेत्र के विकास में योगदान ही राष्ट्र के प्रति उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
लोक निर्माण मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को हिमाचल प्रदेश के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ इसकी भौगोलिक संवेदनशीलता को समझना भी जरूरी है। हाल के वर्षों में मानसून के दौरान हुई भारी तबाही और बादल फटने की घटनाएं इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की कोई दूर की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव हमारे आसपास दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि करीब दो दशक पहले जब वे स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ते थे, तब जलवायु परिवर्तन को सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में एक सामान्य मुद्दे के रूप में पढ़ा जाता था। लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं और इसके दुष्परिणाम प्रत्यक्ष रूप से सामने आ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर कुल्लू, मनाली और लाहौल-स्पीति में प्राकृतिक आपदाओं के कारण जान-माल का नुकसान हुआ है। लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है और घरों के साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचा है।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश में निर्माण कार्यों, बुनियादी ढांचे के विकास और अन्य विकासात्मक गतिविधियों को जारी रखना जरूरी है, लेकिन इसके साथ सतत विकास को प्राथमिकता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विकास ऐसा होना चाहिए, जो पर्यावरण और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल हो तथा भविष्य में लोगों के जीवन और संपत्ति के लिए खतरा न बने। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों को गंभीरता से नहीं समझा गया, तो आने वाले समय में प्रदेश और देश को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
उन्होंने पड़ोसी देश नेपाल में हाल में हुई तबाही का उल्लेख करते हुए प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि विकास की योजनाएं तैयार करते समय पर्यावरणीय संतुलन, प्राकृतिक परिस्थितियों और मानवीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।