बर्नीगाड़ उपतहसील की घोषणा आठ साल बाद भी अधर में, 65 गांवों की जनता परेशान
बड़कोट/नौगांव। विकासखंड नौगांव के बर्नीगाड़ क्षेत्र को उपतहसील बनाने की घोषणा वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने की थी, लेकिन करीब एक दशक बीतने के बावजूद यह घोषणा धरातल पर नहीं उतर सकी है। क्षेत्रीय लोगों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जल्द उपतहसील बर्नीगाड़ को अमल में लाने की मांग की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रस्तावित उपतहसील के अंतर्गत गोडर, खाटल और मुगरसन्ति पट्टी के करीब 65 गांव आते हैं। वर्तमान में इन दूरदराज के ग्रामीणों को आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र और जमीन से संबंधित दस्तावेजों के कार्यों के लिए बड़कोट तक की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि कपनौल, दयाड़ी, सेतवाड़ी सहित दूरस्थ गांवों से बड़कोट आने-जाने में समय और धन दोनों अधिक खर्च होते हैं। ऐसे में बर्नीगाड़ में उपतहसील का गठन होने से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया कि वर्ष 2016 में की गई घोषणा पर अब तक अमल क्यों नहीं हुआ। उनका आरोप है कि लगातार उपेक्षा से क्षेत्र की जनता की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है और घोषणा महज आश्वासन बनकर रह गई है।
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ग्रामीणों ने उत्तराखंड सरकार से मांग की है कि बर्नीगाड़ उपतहसील को जल्द से जल्द अस्तित्व में लाया जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़े। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।