एक आदिवासी बेटी की पुकार... आखिर जवाबदेह कौन?
गुमला की पूर्व प्रत्याशी, संघर्षशील साथी निशा भगत जी अब हमारे बीच नहीं हैं।
उन्होंने जाते-जाते कई सवाल छोड़ दिए। एक बेबाक आदिवासी बेटी को आखिर क्यों ऐसा कदम उठाना पड़ा?
मैं इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करता हूं।
संगठन अलग हो सकता है, लेकिन मानवता का रिश्ता कभी अलग नहीं होता। :देवेंद्र महतो